भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर गड़बड़ियों का खुलासा किया है। यह गड़बड़ियां पूरे राज्य में हुई हैं। राज्य की विधानसभा में इस संबंध में 2018 से 2023 के बीच की ऑडिट रिपोर्ट पेश की गई है।
रिपोर्ट बताती है कि लापरवाही और प्रशासन की निष्क्रियता की वजह से राज्य के 20 जिलों में 77.07 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन का रजिस्ट्रेशन वक्फ की जमीन के रूप में कर दिया गया।
CAG ने 81 वक्फ संपत्तियों की जांच की है और इसमें पता चला है कि 33 संपत्तियां ऐसी थीं जिन पर सरकार का मालिकाना हक था।
यह जमीन कुल 2,09,639.48 वर्ग मीटर में हैं। इन्हें राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था और इनका इस्तेमाल सामुदायिक कामों के लिए किया जाना था।
ऑडिट में इस बात का पता चला है कि इन जमीनों का रजिस्ट्रेशन पूरा होने से पहले ही तमाम जिलाधिकारियों को इस बारे में सूचना भी दी गई थी लेकिन अधिकतर मामलों में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया।
भोपाल के मिसरोद इलाके का मामला क्या है?
इसमें सबसे चौंकाने वाला मामला भोपाल के मिसरोद इलाके का है। यहां नवंबर 2022 में 3600 वर्ग मीटर जमीन को रजिस्टर किया गया था और इसके पीछे यह दावा किया गया था कि इसका इस्तेमाल पहले कब्रिस्तान के रूप में किया जाता था जबकि इस जमीन पर एक सरकारी स्कूल और मिसरोद का पुलिस स्टेशन भी है।
आपत्ति को कर दिया खारिज
इस मामले में यहां के लोगों, तहसीलदार और पुलिस स्टेशन के प्रभारी अफसर ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले की जांच की गई और यह पता चला कि जमीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान के रूप में नहीं होता था लेकिन हैरानी की बात है कि फिर भी इसका वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप में रजिस्ट्रेशन कर दिया गया।
ऐसा ही एक मामला विदिशा जिले में हलाली बांध इलाके की 410 स्क्वायर मीटर वन जमीन के मामले में सामने आया। इसे वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्टर किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि यह जमीन वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे पर दी गई थी और इसका मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं किया जा सकता था लेकिन फिर भी इसका वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्ट्रेशन कर दिया गया।
ऐसे कुछ और भी मामले सामने आए, जैसे सीहोर जिले में 4,006 वर्ग मीटर से अधिक सरकारी जमीन को भी वक्फ संपत्ति बता दिया गया। यहां के गांव वालों का कहना था कि यह जमीन सरकार की है और इसका इस्तेमाल कभी भी कब्रिस्तान के रूप में नहीं होता था लेकिन उनकी आपत्ति को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि आपत्ति 30 दिन का नोटिस पीरियड खत्म होने के चार दिन बाद दर्ज कराई गई।
ऐसे मामले मंदसौर, रायसेन, शिवपुरी, धार आदि जगहों से भी सामने आए।
सरकार ने दिया जांच करने का निर्देश
मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का कहना है कि उन्होंने संबंधित जिलाधिकारियों को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। राजस्व मंत्री का कहना है कि जांच के बाद जो कुछ सामने आएगा, उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। CAG ने इस मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।
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