उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने गुरुवार देर शाम लखनऊ के केजीएमयू मुर्दाघर में पार्टी कार्यकर्ता विनोद साहनी की मौत को लेकर धरना दिया। इलाज के दौरान साहनी की मौत हो गई थी। निषाद ने आरोप लगाया कि गोंडा में उन पर गोली और चाकू से हमला किया गया था।
हालांकि, बाद में रात में पुलिस ने बताया कि साहनी को लाठियों से पीटा गया था और पोस्टमार्टम में गोली या चाकू के कोई घाव नहीं मिले। पुलिस ने साहनी की मौत के सिलसिले में तीन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन की भी पुष्टि की।
मंत्री ने दी चेतावनी
मंत्री संजय निषाद ने चेतावनी दी थी कि अगर गुरुवार रात तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो शुक्रवार को गोंडा जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। विपक्षी नेता भी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में धरने में शामिल हुए और आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में तो मंत्री की भी बात नहीं सुनी जाती।
गोंडा पुलिस ने बताया कि पारसपुर एसएचओ, शाहपुर चौकी प्रभारी और एक कांस्टेबल को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
गोंडा के एसपी ने क्या बताया?
गुरुवार देर रात इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए गोंडा के एसपी अभिषेक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हो गई है कि मौत चोटों के कारण हुई है। शरीर पर गोली लगने या किसी धारदार हथियार से हुए घाव के कोई निशान नहीं मिले हैं। एसपी ने आगे बताया कि बुधवार देर शाम पीड़ित को लाठियों से पीटा गया जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और उसे लखनऊ स्थित केजीएमयू अस्पताल ले जाया गया जहां गुरुवार को उसकी मौत हो गई।
अभिषेक ने कहा, “अब तक की जांच में पता चला है कि विनोद ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं और संतों के खिलाफ कुछ संदेश पोस्ट किए थे, जिससे लोग नाराज हो गए थे। जब वह अपनी दुकान से घर लौट रहा था, तब कुछ स्थानीय लोगों ने उस पर हमला कर दिया। उसे लाठियों से बुरी तरह पीटा गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और बाद में उसकी मौत हो गई। गिरफ्तार किए गए आरोपी ऊंची जाति के हैं।”
राज्य के मत्स्य पालन मंत्री संजय निषाद ने बताया कि पीड़ित विनोद साहनी निषाद समुदाय से ताल्लुक रखता था। अपने बयान में गोंडा पुलिस ने कहा कि साहनी ने 9 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई, उनकी मेडिकल जांच की गई और बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें केजीएमयू रेफर कर दिया गया।
पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने आरोप लगाया कि साहनी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और सांप्रदायिक सामग्री पोस्ट कर रहा था। इसकी वजह से उस पर हमला हुआ। उनकी मृत्यु के बाद पुलिस ने कहा कि एफआईआर में संबंधित धाराएं जोड़ दी गई हैं और बाकी आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए टीमें गठित की गई हैं।
निषाद ने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी
निषाद ने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा और सरकारी नौकरी की मांग की थी। संजय निषाद ने कहा, “मैं इस घटना की निंदा करता हूं। प्रशासन को चेतवनी देता हूं कि अपराध की कोई जाति नहीं होती है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद समुदाय के सदस्यों को पहले भी आपराधिक मामलों और मुठभेड़ों के नाम पर निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा, “ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें हमारे समुदाय के सदस्यों को अपराधी करार दिया गया और एनकाउंटर में मार डाला गया।” सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए निषाद ने कहा, “इसमें एनकाउंटर किया जाए, अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलाया जाए और तत्काल न्याय दिलाया जाए।”
निषाद ने चेतावनी दी कि अगर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो पार्टी अपना आंदोलन तेज कर देगी। उन्होंने कहा, “कल इसके लिए पूरे प्रदेश के लोग आकर प्रशासन के खिलाफ धरना देंगे। न्याय मिलने तक धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।”
विपक्ष भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ
विरोध प्रदर्शन के दौरान निषाद के बगल में बैठे समाजवादी पार्टी के नेता राजपाल कश्यप ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने कहा, “यह घटना दर्शाती है कि इस सरकार के शासन में हमारे समुदाय के सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है। यहां तक कि जब कोई मंत्री विरोध प्रदर्शन में बैठा होता है, तब भी कोई ध्यान देने वाला नहीं होता।”
कश्यप ने आगे कहा, “समाजवादी पार्टी लगतर कश्यप, मल्लाह और निषाद समाज के मुद्दों को उठाती रही है और आगे भी उठती रहेगी। लेकिन ये सरकार अपनी कारवाई में भेदभाव करती है। अगर यहीं अरोपी किसी और समाज के होते तो अब तक उनका एनकाउंटर हो गया होता। लेकिन क्योंकि पीड़ित निषाद समाज का है, इसलिए कोई करवा नहीं सकता, वो भी तब जब एक कैबिनेट मंत्री खुद धरने पर बैठे हैं।” वीआईपी पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी भी निषाद और कश्यप के साथ केजीएमयू मुर्दाघर पहुंचे और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की।
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