ताज़ा खबर
 

RSS से जुड़े संगठनों को जमीन आबंटन बहाल करने की मंजूरी

यूपीए सरकार के समय जिन 20 से अधिक सामाजिक-आर्थिक संगठनों के जमीन आबंटन को रद्द कर दिया गया था, उन्हें इस संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा हाल में एक प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद जमीन वापस मिलने की संभावना है।

Author नई दिल्ली | January 7, 2017 1:00 AM
राष्ट्रीय स्वयंसेवर संघ के कार्यकर्ता दैनिक शिविर के दौरान। (Express file photo by Amit Mehra)

यूपीए सरकार के समय जिन 20 से अधिक सामाजिक-आर्थिक संगठनों के जमीन आबंटन को रद्द कर दिया गया था, उन्हें इस संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा हाल में एक प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद जमीन वापस मिलने की संभावना है। इन संगठनों में अधिकतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े माने जाते हैं। कैबिनेट ने शहरी विकास मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जो अधिकतर संघ से संबद्ध संगठनों की जमीन बहाल करने से संबंधित है। साल 2004 में यूपीए सरकार ने एक सदस्यीय जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर पिछली राजग सरकार में हुए जमीन आबंटनों को निरस्त कर दिया था।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि पिछली सरकार ने कुछ आबंटन रद्द कर दिए थे, वहीं अपने अनुकूल कुछ संस्थाओं के लिए आबंटन को मंजूरी दे दी और इस तरह भेदभाव किया। शिकायती पक्षों ने शहरी विकास मंत्रालय के सामने अपना पक्ष रखा था, जिसने निरस्तीकरण की समीक्षा करने के लिए दो सदस्यों की समिति बनाई थी। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट ने समिति के इस सुझाव को मंजूर किया है कि कुछ को छोड़ कर सभी आबंटन सही थे। कैबिनेट की मंजूरी के साथ शहरी विकास मंत्रालय दिल्ली हाई कोर्ट में समिति की रिपोर्ट को रख सकता है, जहां इस मुद्दे पर एक मामला लंबित है। मंत्रालय निरस्तीकरण को हटाने की मांग करेगा।

भूमि के 29 आबंटनों को निरस्त करने के यूपीए सरकार के फैसले की समीक्षा के लिए गठित समिति ने पिछले साल करीब दो दर्जन आबंटनों को बहाल करने की सिफारिश की थी। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 1998-99 से 2004 के बीच 32 सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों को जमीन आबंटित की थी, जिनमें से 22 संगठन संघ से जुड़े या समर्थित बताए जाते हैं। हालांकि 2004 में यूपीए सरकार ने इस आधार पर 29 आबंटनों को रद्द कर दिया था कि इन आबंटनों में नियमों का उल्लंघन किया गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App