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Hindi Diwas: हिंदी या हिंग्लिश भी बना सकती है आपको डॉक्टर

Hindi Diwas 2018: यह बात मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के इसी साल से लागू अहम फैसले से मुमकिन हो सकी है। फैसले के बाद हिंदी पट्टी के इस प्रमुख राज्य में एमबीबीएस के अलावा नर्सिंग, डेंटल, यूनानी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य चिकित्सा संकायों के पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं हिंदी में दिए जाने का सिलसिला शुरू हुआ है।

Author September 14, 2018 11:47 AM
Hindi Diwas 2018: प्रतिकात्मक तस्वीर।

मध्य प्रदेश में चिकित्सा पाठ्यक्रमों के करीब 40 हजार विद्यार्थियों के लिए भाषा अब कोई बाधा नहीं रह गई है। सूबे में हिंदी में पर्चा देकर भी एमबीबीएस और अन्य पाठ्यक्रमों की प्रतिष्ठित डिग्री हासिल की जा सकती है। यह बात मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के इसी साल से लागू अहम फैसले से मुमकिन हो सकी है। फैसले के बाद हिंदी पट्टी के इस प्रमुख राज्य में एमबीबीएस के अलावा नर्सिंग, डेंटल, यूनानी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य चिकित्सा संकायों के पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं हिंदी में दिए जाने का सिलसिला शुरू हुआ है।

जबलपुर स्थित विवि के कुलपति डॉ. रविशंकर शर्मा ने गुरुवार को बताया, ‘परीक्षाओं के दौरान हमारे लिए यह जांचना जरूरी होता है कि किसी विद्यार्थी को संबंधित विषय का ज्ञान है या नहीं। इसमें भाषा की कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। यही सोच कर हमने अपने सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिंदी या अंग्रेजी मिश्रित हिंदी के इस्तेमाल को अनुमति देने का फैसला किया है।’ उन्होंने बताया कि इस साल सूबे के दस चिकित्सा महाविद्यालयों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब एमबीबीएस पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को हिंदी या अंग्रेजी मिश्रित हिंदी में परीक्षा देने की आजादी मिली। इस बार एमबीबीएस प्रथम वर्ष पाठ्यक्रम के कुल 1,228 में से 380 विद्यार्थियों यानी लगभग 31 फीसद उम्मीदवारों ने हिंदी या अंग्रेजी मिश्रित हिंदी में परीक्षा दी है।

शर्मा ने कहा, ‘इस परीक्षा का नतीजा एकाध महीने में घोषित होने की उम्मीद है। हमें भरोसा है कि यह परिणाम गुजरे बरसों की तुलना में बेहतर होगा क्योंकि इस बार परीक्षार्थियों को हिंदी या अंग्रेजी मिश्रित हिंदी में पर्चा देने का विकल्प भी मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों के करीब 40 हजार विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक परीक्षा ही नहीं, बल्कि प्रायोगिक और मौखिक परीक्षा (वाइवा) में भी हिंदी या अंग्रेजी मिश्रित हिंदी का इस्तेमाल कर सकते हैं।’ वैसे चिकित्सा पाठ्यक्रमों में हिंदी में पढ़ाई विद्यार्थियों के लिए आसान नहीं है। खासकर एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए हिंदी की स्तरीय पुस्तकों का गंभीर अभाव है। इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के सह-प्राध्यापक (एसोसिएट प्रोफेसर) डॉ. मनोहर भंडारी ने इस बात की पुष्टि की और कहा, ‘चिकित्सा पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए हिंदी की अच्छी किताबें बेहद जरूरी हैं। साल 1992 में हिंदी में शोध प्रबंध लिख कर एमडी (फिजियोलॉजी) की उपाधि पा चुके जोशी ने कहा, ‘चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए हिंदी की कुछ किताबें तो ऐसी हैं जिन्हें पढ़ कर सिर पीट लेने का मन करता है। खासकर तकनीकी शब्दों के अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद के समय इन पुस्तकों में अर्थ का अनर्थ कर दिया गया है।’

अंग्रेजी की अनिवार्यता पर चोट
जबलपुर स्थित विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रविशंकर शर्मा ने बताया, ‘परीक्षाओं के दौरान हमारे लिए यह जांचना जरूरी होता है कि किसी विद्यार्थी को संबंधित विषय का ज्ञान है या नहीं। इसमें भाषा की कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। यही सोच कर हमने अपने सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिंदी या अंग्रेजी मिश्रित हिंदी के इस्तेमाल को अनुमति देने का फैसला किया है।’

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