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2030 तक भूमि के उपजाऊपन में गिरावट को रोका जाएगा: हर्षवर्धन

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि मोदी सरकार वर्ष 2030 तक भूमि के उपजाऊपन में गिरावट को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

Author नई दिल्ली | June 17, 2017 2:49 AM
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि मोदी सरकार वर्ष 2030 तक भूमि के उपजाऊपन में गिरावट को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी राष्ट्रीय स्थिति और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सभी घटकों के साथ क्षेत्रीय परामर्श और कार्यशालाओं की एक शृंखला के बाद भारत की नई राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपी) को अंतिम रूप दिया जाएगा। विश्व मरुभूमि प्रसार रोक दिवस की पूर्व संध्या पर मंत्री ने कहा कि भारत स्थानीय भूमि को स्वस्थ और उत्पादक बनाने के लिए शनिवार को गुरुग्राम में एतिहासिक कार्यक्रम किया जाएगा।

सरकार सामुदायिक स्तर पर आजीविका पैदा करने के लिए टिकाऊ भूमि और संसाधन प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि बेहतर भविष्य तैयार हो सके। उन्होंने बताया कि इस साल क ा नारा ‘हमारी भूमि, हमारा घर, हमारा भविष्य’ तय किया गया है। मंत्री ने यह भी कहा कि उत्पादकता को बढ़ाने में किसानों की मदद के लिए सरकार की ओर से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की गई है। योजना के तहत पिछले तीन सालों में 840.52 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जो कि पहले मृदा शोध और विश्लेषण के लिए तय राशि से 30 गुना ज्यादा है। हर्षवर्धन ने कहा कि बंजर भूमि, भूमि क्षरण और सूखे की समस्याओं को दूर करने के प्रयास के बारे में विभिन्न योजनाओं को भी कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना को भारी मात्रा में धन आवंटित किया है। वर्ष 2016-17 में इस योजना के लिए 4,750 करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जबकि वर्ष 2015-16 के दौरान इसके लिए 3,707 करोड़ रुपए जारी किए गए थे।

मंत्री ने बताया कि सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को मजबूत करने के लिए वर्ष 2014-17 के बजट आवंटन में 4510.55 करोड़ रुपए के साथ 22 फीसद की वृद्धि की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए आजीविका अवसरों और कौशल विकास के प्रोत्साहन संबंधी दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रावधानों को वर्ष 2016-17 के 3,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर वर्ष 2017-18 में 4,500 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इस तरह निधियों के आवंटन में 33 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के अलावा दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना और ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय हरित भारत मिशन और राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम ऐसी प्रमुख योजनाएं है जो जमीनों के रेतीले होने, जमीनों की गुणवत्ता कम होने और सूखे की समस्याओं से निपटने के लिए काम करती है।

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