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बिल्‍ली के लिए 13 महीने से लड़ रहा यह शख्‍स, पुलिस बंद करना चाहती थी केस, कोर्ट से लिया दोबारा जांच का आदेश

शख्स के मुताबिक, "मेरे कुछ पड़ोसी जूली से नफरत करते थे, क्योंकि उसने एक बार उनके रसोईघर में सामान फैला दिया था।"

कोलकाता से लापता बिल्ली का नाम जूली था। वह तीन बच्चों की मां थी। 14 नवंबर 2016 को वह घर से गायब हो गई थी। (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में एक शख्स 13 महीनों से पुलिस थानों और कोर्ट के चक्कर काट रहा है। वह पुलिसकर्मियों से उलझा। केस को बंद होने से बचाने के लिए हाईकोर्ट तक गया और दोबारा जांच के आदेश दिलाए। ऐसा सिर्फ और सिर्फ उसने एक बिल्ली के लिए किया है, जो अभी भी लापता है। सेंट्रल एवेन्यू इलाके में रहने वाले कारोबारी तेजस बोले के पास एक पालतू बिल्ली थी, जिसका नाम उन्होंने जूली रखा था। वह तीन बच्चों की मां थी। पिछले साल 14 नवंबर को वह घर से गायब हो गई थी, तब से उसका कुछ पता नहीं चल सका है। बोले ने जूली के लापता होने पर पुलिस में शिकायत दी थी। चिकित्सा उपकरणों की ऑनलाइन डायरेक्ट्री चलाने वाले बोले ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया, “मेरे कुछ पड़ोसी जूली से नफरत करते थे, क्योंकि उसने एक बार उनके रसोईघर में सामान फैला दिया था। मैं पहले चुप था। लेकिन कुछ दिन पहले एक-एक करके उसके बच्चे गायब होने लगे। हालांकि, मैं उन्हें ओएलएक्स या क्विकर के जरिए किसी को देना चाहता था। लेकिन इस बार मैं इस मामले को लेकर आगे आया।”

बोले की शिकायत पर बोबाजार पुलिस ने रिपोर्ट तो लिखी थी, लेकिन उसे हल्के में लिया गया था। ऐसे में 18 नवंबर 2016 को उन्होंने इस मामले को लेकर पुलिस कमिश्नर को शिकायती ई-मेल लिखा। अगले दिन बोबाजार थाने से एक पुलिसकर्मी बोले से मिलने आया। तीन दिनों बाद उस मेल पर जवाब आया कि डिप्टी कमिश्नर इस बाबत मदद करेंगे। चार दिनों बाद चोरी व जानवरों की हत्या या उन्हें अपंग करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मगर मई 2017 आते-आते लापता बिल्ली का मामला ठंडे बस्ते में जाने लगा। यहां तक कि पुलिसकर्मी तो मामले की क्लोजर रिपोर्ट तक तैयार करने वाले थे।

13 महीनों पहले गायब हुई जूली काले रंग की थी। वह दिखने में बिल्कुल ऐसी ही थी। (प्रतीकात्मक फोटोः पिक्साबे)

पुलिस की जांच रिपोर्ट पर अगस्त में बोले ने एक नाराजी याचिका दायर की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने सुनवाई के लिए 24 नवंबर की तारीख तय की। बोले अब और इंतजार नहीं करना चाहते थे। उनके हाईकोर्ट पहुंचने के तीन दिनों बाद जस्टिस जॉयमाला बागची ने ट्रायल कोर्ट में उनकी याचिका के शीध्र निपटारे का आदेश दिया। 17 अक्टूबर को निचली अदालत ने बोबाजार पुलिस को मामले की नई सिरे से जांच करने को कहा। बोले ने इस बाबत कहा, “मुझे उम्मीद है कि आखिरकार मेरी बिल्लियों को न्याय मिलेगा। मैंने पुलिस को कुछ सबूत और मैसेज के स्क्रीनशॉट्स दिए हैं, जिनकी वजह से मुझे पड़ोसियों पर शक है।”

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