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दिल्ली मेरी दिल्ली: सिरदर्द बनता प्रचार, मोटी तोंद और योग, जूट न कपास…

बसों-मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा वाली योजना अभी सरकार के पास भले कागजों में हो लेकिन इस बाबत किए गए प्रचार ने ‘हम बस परिचालकों’ को आफत में डाल दिया है।

Delhi Metro Free Travel, Delhi Metro, DMRC, DTC, DTC Bus, Free Metro for Women, Implementation Plant, Tokens, Smartcards, Delhi, New Delhi News, State News, National News, India News, Hindi Newsयोजना शुरू करने के लिए डीएमआरसी ने दिल्ली सरकार से एडवांस में सब्सिडी की रकम मांगी है। (क्रिएटिवः नरेंद्र कुमार)

सिरदर्द बनता प्रचार
महिलाओं को दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में मुफ्त यात्रा लागू होने के बाद डीटीसी और दिल्ली मेट्रो का क्या होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन प्रस्ताव मात्र का प्रचार जिस तरह से सरकार ने किया वह बसों के परिचालकों की सिरदर्दी अभी से बनता जा रहा है। बीते दिनों ऐसा ही माजरा दिखा क्लस्टर बस में। टिकट न लेने पर अड़ी महिला को कई लोगों ने समझाया और टिकट भी दिलाया, लेकिन वह आखिर तक इस बात पर टिकी रही कि सफर तो अब मुफ्त हो चुका है, फिर पैसे क्यों? इतना ही नहीं जैसे ही लाजपत नगर क्रासिंग का बस स्टाप आया वह महिला खड़ी होकर वहां लगे इश्तिहार दिखाने लगी। लोगों ने बताया कि अभी वह प्रस्ताव का प्रचार है। योजना लागू होने पर सभी महिलाएं मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। परिचालक की आपबीती तो और बुरी दिखी। उसने कहा-भाई साहब, यह पहला मामला नहीं है। रोज कई महिलाओं को इस बाबत समझाता हूं। बसों-मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा वाली योजना अभी सरकार के पास भले कागजों में हो लेकिन इस बाबत किए गए प्रचार ने ‘हम बस परिचालकों’ को आफत में डाल दिया है। जल्दी ये लागू हो जाती तो कम से कम समझाना तो नहीं पड़ता।

मोटी तोंद और योग
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मोटे तोंद वाले एक पुलिस अधिकारी को देख स्थानीय लोगों की हंसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी। दरअसल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिल्ली पुलिस ने भी अपनी ओर से सारे अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी-अपनी जगहों पर योगाभ्यास और योग शिविर में भाग लेने के लिए प्रेरित किया था। इंडिया गेट पर योग कार्यक्रम के दौरान दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी बार-बार हांफ रहे थे। वहां केंद्रीय रक्षा मंत्री भी शामिल हुए थे, लिहाजा सभी लोग बिना कुछ सोचे योग कार्यक्रम में शामिल होकर गदगद हो रहे थे। इसी कार्यक्रम में शामिल एक सज्जन ने बताया कि दरअसल बहुत ज्यादा मोटे लोगों को योग की कुछ क्रियाओं में बहुत दिक्कतें होती हैं, लेकिन पुलिस अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं थे और उन्हें देखकर अन्य लोगों की हंसी रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

जूट न कपास…
यह कहावत काफी लोकप्रिय है कि जूट न कपास जुलाहों में लठ्म-लट्ठा। दिल्ली में 15 साल राज करने के बाद एक के बाद एक चुनाव में पराजित होने के बावजूद कांग्रेस के नेता सबक लेने को तैयार नहीं हैं। लोकसभा चुनाव में चाहे जिन कारणों से आम आदमी पार्टी (आप) से आगे निकल गई कांग्रेस पार्टी के नेता उस बुनियाद पर फिर से इमारत बनाने के बजाए उसे ही ध्वस्त करने की होड़ में लग गए हैं। 81 साल की शीला दीक्षित को पार्टी ने दिल्ली की बागडोर तीन कार्यकारी अध्यक्षों के साथ इसीलिए दी कि वे शरीर से ज्यादा सक्रिय नहीं रह पाएंगी। पार्टी उनके दिल्ली में किए गए कामों के आधार पर फिर से कांग्रेस को सत्ता में लाने लायक बनाएगी। संयोग ऐसा बना कि पार्टी नेतृत्व ने जिन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया वे भी संगठन से अनजान हैं और उनका जमीन से भी अब जुड़ाव कम है।

सबसे बड़ा संकट यह हो गया कि जो नेता दीक्षित के साथ प्रदेश कांग्रेस की टीम में सक्रिय हुए वे भी उसी तरह के हैं। समस्या यह हो गई है कि अमूक नेता के साथ काम करने वाले को दूसरे नेता महत्व नहीं देंगे। भले ही उससे पार्टी और उनका असर कम हो रहा हो। यह पहला अवसर है कि पहले विधायक रहे नेताओं को पार्टी में कम महत्व दिया जाने लगा और फिर सांसद रहे नेताओं को दर किनार किया गया। गुटबाजी इस कदर हो गई है कि पार्टी अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है, बावजूद इसके एक दूसरे की टांग खिंचाई जारी है। किसी को किसी नेता से परहेज है तो किसी को प्रभारी ही पसंद नहीं है। यह सभी को पता है कि ‘आप’ कांग्रेस के वोटों पर ही राज कर रही है, ऐसे में कांग्रेस के मजबूत हुए बिना वह अपनी पुरानी जगह कैसे पा सकती है।
-बेदिल

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