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अध्यात्म का पाठ पढ़ने पहुंचे नौकरशाह

केंद्र की मोदी सरकार अपने हर काम में अध्यात्म और साधु-संत का सहयोग लेना पसंद करती है। इसके साथ ही सरकार अब देश भर के नौकरशाहों का झुकाव ध्यान और अध्यात्म की ओर करना चाहती है।

Author नई दिल्ली | January 22, 2017 1:21 AM
वैसे तो इस स्मृति भवन को बसपा सुप्रीमों और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बनवाया था लेकिन अब इसनें बीजेपी द्वारा चुना गया मुख्यमंत्री शपथ लेगा।

केंद्र की मोदी सरकार अपने हर काम में अध्यात्म और साधु-संत का सहयोग लेना पसंद करती है। इसके साथ ही सरकार अब देश भर के नौकरशाहों का झुकाव ध्यान और अध्यात्म की ओर करना चाहती है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने इस ओर कदम भी बढ़ा दिए हैं। नौकरशाहों को प्रशिक्षण देनेवाला यह विभाग अब ध्यान और अध्यात्म से भी लैस करवाएगा। और, इसके लिए जिस जगह को चुना गया है वह है तमिलनाडु के कोयंबटूर में सद्गुरु जग्गी वासुदेव का आश्रम जो इशा फाउंडेशन के तहत चलता है। विभाग का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम से नौकरशाहों को तनाव से मुक्ति मिलेगी और वे अपने कार्यक्षेत्र की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर पाएंगे। लगभग 85 नौकरशाह वासुदेव आश्रम में 23 से 27 जनवरी तक चलने वाले इस खास कोर्स के लिए रवाना हो चुके हैं। गौरतलब है कि खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा यह आश्रम इन दिनों ध्यान और अध्यात्म के केंद्र के रूप में खासा चर्चित हो चुका है। दुनिया भर में इसके 200 केंद्र हैं। इसी आश्रम में प्रशिक्षण लेने के लिए देश भर के सात दर्जन से ज्यादा नौकरशाहों को चुना गया है। सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा कैडर से पीके दास, धनपत सिंह, श्रीकांत बालगत शनिवार को वासुदेव आश्रम के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं भारत सरकार में डेपुटेशन पर आए हरियाणा कैडर के राजीव अरोड़ा और ज्योति अरोड़ा भी इस शिविर में शिरकत करने के लिए रवाना हो चुके हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कोयंबटूर गए हरियाणा कैडर के धनपत सिंह ने बताया कि अभी तक हमने वित्त और सांख्यिकी से जुड़े कई कोर्स में प्रशिक्षण लिया है, लेकिन इस तरह के आध्यात्मिक सत्र में पहली बार जा रहे हैं। तो क्या नौकरशाहों के लिए तनाव एक बड़ी समस्या है, इस सवाल पर सिंह कहते हैं कि आजकल तनाव तो केजी के बच्चों को भी हो जाता है। उन्होंने बताया कि अभी हमें इसका पूरा विवरण नहीं मिला है कि कोर्स के दौरान किस चीज का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण शिविर खत्म होने के बाद ही इसके बारे में कुछ बोला जा सकता है। इस बाबत जनसत्ता के सवाल पर नौकरशाह राजीव अरोड़ा ने भी कहा कि बिना कोर्स में शिरकत किए इस मसले पर कुछ कहा नहीं जा सकता है। कोर्स पूरा होने के बाद ही अनुभवों पर बात की जा सकती है।

गौरतलब है कि सद्गुरु जग्गी वासुदेव इन दिनों विभिन्न मंचों पर नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन करते दिखते रहे हैं। जयपुर साहित्य महोत्सव में उन्होंने केंद्र की नोटबंदी का समर्थन करते हुए कहा था कि यह एक पीड़ादायक लेकिन अहम फैसला है। उन्होंने इसे देश के आर्थिक जगत की स्थिति बदल देनेवाला जबर्दस्त फैसला बताते हुए कहा कि इसके परिणाम उचित समय पर दिखाई देंगे। उन्होंने तमिलनाडु में जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध की तीखी आलोचना करते हुए इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है।
इसके पहले जग्गी वासुदेव का नाम भाजपा की सरकार वाले मध्य प्रदेश से भी जुड़ चुका है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री राज्य में ‘हैपीनेस मंत्रालय’ खोलने का एलान कर चुके हैं और दावा किया गया है कि इसके पीछे जग्गी वासुदेव की ही सलाह थी।

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