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Budget 2019: हलवा सेरेमनी से गोपनीयता तक बेहद खास हैं बजट की परंपराएं और अब तक हुए बदलाव

Budget 2019 Highlights in Hindi: बजट से जुड़ी कई अहम और रोचक परंपराएं हैं। गोपनीयता बजट निर्माण से पेश करने तक की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

Author Updated: February 1, 2019 11:40 AM
Budget 2019 vs Budget 2018 Income Tax Slab Rate: पीयूष गोयल Express pictures by Praveen Khanna

Union Budget 2019-20 India: मोदी सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने जा रही है। चुनावी साल होने के चलते इस बार अंतरिम बजट पेश किया जाना है। देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और योजनाओं को हकीकत बनाने के लिए पैसों का आवंटन यानी बजट सरकार के सालाना कार्यक्रमों के शीर्ष पर शुमार है। मोटेतौर पर यहीं से सालभर में होने वाले देश के विकास की दिशा तय होती है। शेरों-शायरी के साथ शुरू होने वाली प्रक्रिया अपने आप में कई रोचक परंपराएं समेटे हुए हैं। देश की आजादी से लेकर अब तक कई बार इनमें अहम बदलाव भी हुए हैं।

हलवा सेरेमनीः बजट पेश करने से पहले हर साल हलवा सेरेमनी का आयोजन किया जाता है। इस सेरेमनी में वित्त मंत्री अपने मंत्रालय के अधिकारियों-कर्मचारियों को हलवा बांटकर कार्यक्रम की शुरुआत करते हैं।

कर्मचारियों पर तालाबंदीः स्वीट सेरेमनी के करीब एक हफ्ते पहले ही बजट की आधिकारिक छपाई शुरू हो जाती है। इसके साथ ही इससे जुड़े किसी भी कर्मचारी को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। उन्हें किसी भी बाहरी व्यक्ति से किसी तरह के संपर्क की इजाजत नहीं होती है। यहां तक कि खाने से लेकर चिकित्सा या आपातकालीन परिस्थितियों में भी उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में ही बाहर जाने की इजाजत होती है।

क्या है ब्लू शीट और सीक्रेट फाइलः बजट पेश किए जाने से पहले इसकी गोपनीयता का बेहद संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखा जाता है। बजट के सभी दस्तावेजों के अहम बिंदु जिस शीट में लिखे होते हैं उसे ब्लू शीट कहते हैं। इसे कड़ी सुरक्षा और निगरानी में रखा जाता है यहां तक की खुद वित्त मंत्री को भी इसे रखने की अनुमति नहीं होती है। बजट की जानकारियों को सुरक्षित रखने के लिए फोन और कंप्यूटर की टैपिंग, सर्विलांसिंग, कैमरे, जैमर, स्कैनर जैसी व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।

वित्तमंत्री का सूटकेसः बजट के दस्तावेजों को लोकसभा में जाते वक्त एक सूटकेस में ले जाया जाता है। यह परंपरा 1860 से चली आ रही है। इस सूटकेस के साथ फोटो भी खिंचवाया जाता है। इस परंपरा में लेदर बैग, वेलवेट सूटकेस समेत कई तरह के छोटे-छोटे बदलाव भी देखने को मिले।

बजट एकीकरणः पहले आम बजट और रेल बजट अलग-अलग पेश किए जाते थे। मोदी सरकार ने इस परंपरा को बदलते हुए दोनों का एकीकरण कर दिया। 2019 में तीसरा मौका है जब रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा। 1924 में शुरू हुई इस परंपरा को 2016 में खत्म करने का फैसला किया गया। 2016 में आखिरी बार अलग रेल बजट पेश हुआ था।

तारीख में बदलावः 2016 तक बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस को पेश किया जाता था लेकिन 2017 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसमें बदलाव को 1 फरवरी को ही पेश किए जाने की शुरुआत हो गई। यह बदलाव वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में विकास की गति बढ़ाने के लिए किया गया था।

समय में बदलाव: तारीख ही नहीं बजट पेश करने के समय में भी बदलाव हो चुका है। 1999 तक बजट की घोषणा शाम को 5 बजे तक की जाती थी लेकिन इसके बाद अटल सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने परंपरा तोड़ते हुए सुबह 11 बजे बजट पेश करने की शुरुआत की।

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