अयोध्या में स्थित श्री राम मंदिर में चढ़ावे के विवाद के मामले में बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि इसमें शामिल लोगों को कतई बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि चढ़ावे में चोरी, गबन और हेरा-फेरी की खबरें बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। बसपा सुप्रीमो ने यह भी कहा है कि इस मामले का राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश में सियासत काफी गर्म है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। इसके बाद एफआईआर दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को अपने ऑफिशियल X हैंडल पर कहा कि आगे से राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे में किसी तरह की कोई शिकायत ना आए, इसके लिए देश में जो दूसरे बड़े मंदिर हैं वहां पर चढ़ावे के हिसाब-किताब के लिए जो व्यवस्था है, उसे अयोध्या में भी लागू करके इस मसले को सुलझाया जाना ठीक होगा।
उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने कहा कि देश में राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण भी नहीं होना चाहिए।
चढ़ावे को लेकर विवाद बढ़ने के बाद चंपत राय को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके साथ ही ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को भी अपना पद छोड़ना पड़ा।
दूध का दूध और पानी का पानी…
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले सभी विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस मामले में राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की है क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि गड़बड़ी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।
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अयोध्या बार एसोसिएशन ने फैसला किया है कि जिले का कोई भी वकील राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। इससे अब आरोपियों को वकील मिलने की संभावना कम हो गई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
