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मुजफ्फरनगर शेल्‍टर होम में भद्दे गानों पर लड़कियों को नचाते, बलात्‍कार करते थे मेहमान- चार्जशीट में कई और खौफनाक बातें

चार्जशीट में कहा गया है कि जो लड़कियां मेहमानों का मनोरंजन करने से इनकार कर देती थीं उनके साथ मारपीट की जाती थी, यातनाएं दी जाती थीं और रात में खाने में सिर्फ नमक और रोटी दी जाती थी। वहीं, जो लड़कियां नाचती थीं उन्हें अच्छा खाना दिया था।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ 73 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई ने चार्जशीट में खौफनाक बातों का खुलासा किया है। चार्जशीट में कहा गया है कि मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर अपने मेहमानों के सामने युवतियों को कम कपड़े पहनकर भद्दे गानों पर नाचने के लिए मजबूर करता था और फिर उनका बलात्कार करवाता था। चार्जशीट में कहा गया है कि लड़कियों को ड्रग्स भी दी जाती थीं। सीबीआई की चार्जशीट में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के अलावा 20 और लोगों के नाम शामिल हैं लेकिन इसमें वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का न होना जांच पर सवाल खड़े कर रहा है। आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत गंभीर अपराधों में मामला दर्ज किया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि जो लड़कियां मेहमानों का मनोरंजन करने से इनकार कर देती थीं उनके साथ मारपीट की जाती थी, यातनाएं दी जाती थीं और रात में खाने में सिर्फ नमक और रोटी दी जाती थी। वहीं, जो लड़कियां नाचती थीं उन्हें अच्छा खाना दिया था।

सीबीआई ने गवाहों की लिस्ट में 101 लोगों के नाम दर्ज किए हैं जिनमें 33 पीड़िताएं शामिल हैं। सीबीआई ने चार्जशीट में कहा है कि ब्रजेश ठाकुर शेल्टर होम का मालिक था, जिसे गैर-सरकारी सेवा संकल्प एवं विकास समिति चलाती थी। सीबीआई ने चार्जशीट में कहा है कि अगर लड़कियां मेहमानों के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करती थीं तो ब्रजेश ठाकुर उनके प्राइवेट पार्ट्स को चोट पहुंचाता था। चार्जशीट में कहा गया है कि रवि कुमार रौशन और मामू नाम के शख्स अक्सर मेहमानों के सामने लड़कियों को नचाने और उनका बलात्कार किए जाने में ब्रजेश की सहायता करते थे। रौशन बाल सुरक्षा अधिकारी के तौर पर नियुक्त था, उस पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। वहीं, बाल कल्याण समिति का सदस्य विकास कुमार अक्सर लड़कियों को नींद की गोलियां देकर उनका बलात्कार करता था।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप कुमार वर्मा पर नाबालिग बच्चियों को हवस का शिकार बनाने का आरोप है। लड़कियों के साथ दरिंदगी किए जाने का मामला पिछले वर्ष अप्रैल में उस वक्त सामने आया था जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित शेल्टर होम की ऑडिट रिपोर्ट तैयार की थी। मेडिकल टेस्ट से पता चला था कि 44 लड़कियों में से 34 लड़कियों को यौन अपराध का शिकार बनाया गया था और चार वर्षों से उनके साथ दरिंदगी को अंजाम दिया जा रहा था। वहीं, मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के राजनीतिक संबंध होने की बात कही जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ब्रजेश ठाकुर जांच को प्रभावित कर सकता है इसलिए उसे बिहार की जेल से पंजाब की जेल नें शिफ्ट कर देना चाहिए। मुजफ्फरपुर नगर निगम ने भवन कानूनों के उल्लंघन मामलें चार मंजिला शेल्टर होम को ध्वस्त कर चुका है।

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