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संकट से बुजुर्गों को बचाता है पूर्व जवानों का बिग्रेड

दो दशक की अपनी सेवा के दौरान सेना के जवान सैफुल आलम ने वैसे तो कई लोगों की जान बचाई लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद संकट में घिरे लोगों की मदद के लिए उन्होंने दूसरा तरीका ढूंढ निकाला है।

Author कोलकाता | February 2, 2016 04:43 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

दो दशक की अपनी सेवा के दौरान सेना के जवान सैफुल आलम ने वैसे तो कई लोगों की जान बचाई लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद संकट में घिरे लोगों की मदद के लिए उन्होंने दूसरा तरीका ढूंढ निकाला है। दरअसल, सैफुल आलम पूर्व सैनिकों की एक ऐसी छोटी टुकड़ी का हिस्सा बन गए हैंं जो किसी बुजुर्ग नागरिक के अपनी स्मार्ट घड़ी का संकट सूचक बटन दबाते ही उन्हें तुरंत इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए हरकत में आ जाती है।

कोलकाता के स्टार्ट-अप ‘सपोर्ट एल्डर्स’ का हिस्सा बने 40 साल के सेवानिवृत्त जवान ने को बताया, ‘सेवानिवृत्ति के बाद भी मेरे जीवन में बदलाव नहीं आया है। अभी भी मैं सेना के एक जवान की तरह ही महसूस करता हूं क्योंकि मैं समाज के बेहद अहम तबके की सेवा कर रहा हूं।’
उद्यमी अप्रतिम चक्रवर्ती की अगुआई में इस सामाजिक पहल के जरिए शहर में या उसके बाहरी इलाकों में अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए घर पर मदद मुहैया कराई जाती है।

बीमारी के अलावा, बुजुर्गों के स्नानघर या सीढ़ियों पर गिरने का भी खतरा बना रहता है। ऐसे मामलों में उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है लेकिन अकेले रह रहे बुजुर्ग या बुजुर्ग दंपति अक्सर ऐसी स्थिति में खुद को असहाय पाते हैं। ऐसे समय में पूर्व जवानों की यह टुकड़ी सबसे पहले हरकत में आती है।

‘सपोर्ट एल्डर्स’ कंपनी के क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों में केवल पूर्व सैन्यकर्मी हैं जबकि संचालन अधिकारी एक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर हैं।
पिछले साल संगठन की शुरुआत करने वाले उद्यमी ने कहा, ‘जब भी कोई आपात स्थिति आती है या जब स्थिति हमारे हाथ से निकल जाती है तो ऐसे समय में सेना को ही मदद के लिए बुलाया जाता है। ये जवान 35-45 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाते हैं लेकिन योगदान देने के लिहाज से उनके पास काफी कुछ रहता है।’ पूर्व जवानों का एक प्रमाणित ट्रैक रिकार्ड, अनुशासित जीवन होता है साथ ही इसके लिए उन्हें न्यूनतम प्रशिक्षण की जरूरत होती है।

पिछले साल दिसंबर में आलम को कंपनी के कॉल सेंटर से फोन आया और वह अपनी मोटरसाइकिल से साउथ सिटी अपार्टमेंट पहुंचे गए थे। अगले 10 मिनटों में वे बुजुर्ग दंपति के फ्लैट में थे और डॉक्टर के आने से पहले वह उनकी प्राथमिक इलाज कर चुके थे। उन्होंने घटना को याद करते हुए बताया, ‘मैंने उनके मधुमेह और रक्तचाप का स्तर जांच लिया था, ताकि डाक्टर के आने पर उन्हें सब कुछ तैयार मिले और वह तुरंत इलाज शुरू कर सके।’

बुजुर्गों को ना केवल आपात स्थिति में बल्कि दवाई खरीदने या राशन की छोटी-मोटी चीजें खरीदने के लिए भी मदद की जरूरत होती है। इस सेवा के तहत उनके सदस्यों को एक खास तरह से बनाई गई स्मार्ट कलाई घड़ी दी जाती है। फोन के सिम कार्ड से चलने वाली घड़ी में संकट सूचक बटन है जो उनके 24 घंटे चलने वाले कॉल सेंटर को एक संकट सूचक ‘एसओएस’ संदेश भेजता है।
चट्टोपाध्याय ने बताया, ‘यह घड़ी अमेरिका से मंगाई की गई है। यह ऐसी घड़ी है जिससे आप हमसे बात भी कर सकते हैं। आपात सेवा के तहत अगर कोई व्यक्ति बोलने में अक्षम है तो जीपीएस तकनीक के जरिए हमें व्यक्ति के सटीक स्थान का पता चलता है।’

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