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इंसेफेलाइटिस से कितनी मौतें हुईं, पहले रोज बताता था गोरखपुर का BRD अस्‍पताल, अब नहीं

एक स्थानीय पत्रकार का कहना है कि यह कदम इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों के आंकड़ों को खबर बनने से रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार इस कदम से मौत के आंकड़े छिपाकर खुद को शर्मिंदा होने से बचाना चाहती है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हेल्थ बुलेटिन जारी करने पर लगायी रोक। (file photo)

बीते साल गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में एक हफ्ते में 60 से ज्यादा बच्चों की मौत और उसके बाद हुए हंगामे की घटना के बाद अब अस्पताल प्रशासन ने हेल्थ बुलेटिन जारी करने पर ही रोक लगा दी है। माना जा रहा है कि जिस तरह से पिछले साल बच्चों की मौत के बाद जिस तरह से अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार को आलोचना झेलनी पड़ी थी, उसी को देखते हुए हेल्थ बुलेटिन जारी नहीं करने का फैसला किया गया है। न्यूज 18 की एक खबर के अनुसार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल गणेश कुमार का कहना है कि हम अब प्रिंसीपल सेक्रेटरी ऑफ हेल्थ के आदेश के बाद इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का आंकड़ा चीफ मेडिकल ऑफिसर को भेजते हैं और अब वह इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का आंकड़ा जारी करने के लिए अधिकृत नहीं है।

एक स्थानीय पत्रकार का कहना है कि यह कदम इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों के आंकड़ों को खबर बनने से रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार इस कदम से मौत के आंकड़े छिपाकर खुद को शर्मिंदा होने से बचाना चाहती है। जबकि पिछले 10 सालों से हर रोज हेल्थ बुलेटिन देने का नियम रहा है। नए नियमों के अनुसार, अब अस्पताल प्रशासन हर हफ्ते सीएमओ ऑफिस अस्पताल में होने वाली मौतों का आँकड़ा भेजेगा। खास बात ये है कि सीएमओ ऑफिस भेजे जाने वाले आंकड़ों में सिर्फ एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम से होने वाली मौतों का आंकड़ा भेजा जाएगा और इसमें जापानीज इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का आंकड़ा शामिल नहीं होगा। बता दें कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर साल बरसात के मौसम में इन्सेफेलाइटिस का कहर फैलता है, जो कि हर साल बड़ी संख्या में नवजात बच्चों के लिए जानलेवा साबित होता है।

अब चूंकि पिछले एक हफ्ते से पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी बारिश हो रही है तो ऐसे में लोगों को एक बार फिर इन्सेफेलाइटिस फैलने का डर सता रहा है। हालांकि डॉ. गणेश कुमार का कहना है कि अस्पताल इस बार परिस्थिति का सामना करने के लिए पहले से ज्यादा तैयार है। जब डॉ. गणेश कुमार से अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सैलरी का मामला है, जिस कारण अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या कम है। इस बारे में सरकार को सूचित कर दिया गया है।

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