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पीरियड्स पर बोले मनीष सिसोदिया- शर्म की बात नहीं, लड़कियों से ज्यादा लड़कों का इस बारे में जानना जरुरी

सिसोदिया के मुताबिक, ‘‘यह हमारी संवादहीनता को दर्शाता है जिसमें एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया को भी वर्जित बना दिया गया है। इस बारे में लड़कियों से ज्यादा लड़कों को शिक्षित करने की जरूरत है।

Author नई दिल्ली | May 22, 2017 9:39 PM
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया। (फाइल फोटो)

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को कहा कि जहां मासिक धर्म (Menstruation) जैसे विषयों पर दबे स्वर में चर्चा होती है, ऐसे में इस विषय पर लड़कियों से ज्यादा लड़कों को संवेदनशील बनाना समय की जरूरत है। नेशनल मेंस्ट्रुअल कांक्लेव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सिसोदिया ने लड़के और लड़कियों में समान तरीके से मासिक धर्म और इससे जुड़ी साफ-सफाई के विषयों पर जागरुकता लाने के लिए शिक्षा प्रणाली की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘‘स्कूल चाहरदीवारी वाली जगह बन गये हैं जहां बच्चे केवल शिक्षा ग्रहण करते हैं। लेकिन विद्यालय ऐसे मुद्दों को सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं जो पिछले कुछ सालों में समाज में बातचीत के लिहाज से वर्जित से हो गये हैं।’’ सिसोदिया ने कहा कि मासिक धर्म कोई शर्म का कारण नहीं। किसी भी महिला के लिए यह गौरव का कारण है। यही उसके मां बनने का आधार भी है।

सिसोदिया के मुताबिक, ‘‘यह हमारी संवादहीनता को दर्शाता है जिसमें एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया को भी वर्जित बना दिया गया है। इस बारे में लड़कियों से ज्यादा लड़कों को शिक्षित करने की जरूरत है। ताकि लड़कियां और महिलाएं अपने चारों ओर एक सहयोग का माहौल महसूस कर सकें और अलग-थलग महसूस नहीं करें।’’उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के विषयों पर सामान्य माहौल बनाने के लिए स्कूली शिक्षा प्रणाली में और सोच में आमूल-चूल परिवर्तन की दरकार है। सिसोदिया ने कहा, ‘‘कोई अभियान तभी सफल होगा जब इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए हमें इस तरह के और अभियानों और एनजीओ की जरूरत ही नहीं पड़े। यह समाज के प्रत्येक सदस्य की सकारात्मक और रचनात्मक भागीदारी से ही संभव होगा।’’

बता दें कि कुछ महीने पहले कांग्रेस के एक मुस्लिम नेता ने पूजा स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवादित बयान दिया था। कांग्रेस नेता एमएम हसन ने कहा है कि मासिक धर्म अपवित्र होता है और महिलाओं को उन दिनों में किसी भी पूजा या इबादत की जगह पर नहीं जाना चाहिए। इसके पीछे भी वैज्ञानिक वजह है कि क्यों उन्हें प्रवेश नहीं करना चाहिए। इसका कोई और मतलब ना निकाला जाए।” मुस्लिम महिलाओं को उदाहरण देते हुए हसन ने कहा, “उन दिनों में मुस्लिम महिलाएं भी रोजा नहीं रखती हैं। मेरा मानना है कि जब महिलाओं का शरीर अपवित्र हो तो उन्हें मंदिर, मस्जिद या चर्च नहीं जाना चाहिए। कई छात्रों ने कांग्रेस नेता के इस बयान की आलोचना की। हालांकि हसन अपने बयान पर बने रहे।

 

 

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