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बिहार: कन्‍या स्‍कूल की किताब में आसाराम को बताया ‘संत’, प्रिंसिपल ने झाड़ा पल्‍ला

प्रिंसिपल ने कहा कि किताब से आसाराम का नाम नहीं हटाया गया, जो कि बहुत गलत बात है, ये प्रकाशन की गलती ही कही जाएगी। इसके साथ ही प्रिंसिपल ने कहा कि उनके द्वारा प्रकाशन से इस मामले में जरूर सवाल किए जाएंगे।

नाबालिग से रेप के मामले में आसाराम जोधपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। (फोटो सोर्स- एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

बिहार के आरा जिले के कन्या स्कूल में तीसरी कक्षा के बच्चों की एक किताब में नाबालिग से रेप के दोषी आसाराम को ‘संत’ बताया गया है। जिले के अर्ध सरकारी स्कूल भगिनी निवेदिता कन्या विद्यालय में तीसरी कक्षा के बच्चों की नैतिक शिक्षा एवं सामान्य ज्ञान की पुस्तक ‘ज्ञान सेतु’ में आसाराम को संत कहा गया है। इस पुस्तक के पहले अध्याय में ‘देश के प्रसिद्ध संत’ के तौर पर आसाराम की तस्वीर छापी गई है। यह मामला सामने आने के बाद से ही इस पर बवाल मचा हुआ है। इस अध्याय में आसाराम के अलावा संत कबीर, गौतम बुद्ध, मदर टेरेसा, मीराबाई, गुरुनानक, स्वामी विवेकानंद, बाबा रामदेव की तस्वीर भी छपी है।

इनाडु इंडिया के मुताबिक संतों की लिस्ट में रेप के दोषी आसाराम का नाम शामिल करने पर स्कूल की प्रिंसिपल कुंदन कुमारी ने इस पूरे मामले के पीछे पुस्तक छापने वाले प्रकाशन को जिम्मेदार ठहराते हुए पल्ला झाड़ लिया है। प्रिंसिपल ने कहा, ‘सिलेबस की जहां तक बात है तो यह पब्लिकेशन की गड़बड़ी है। पहले तो रहा होगा आसाराम, लेकिन जबसे आसाराम प्रकाश में आया है तो प्रकाशन को भी इसे सिलेबस से हटा देना चाहिए था। हमें जैसे ही यह पता चला तो हमने बच्चों से यह किताब वापस ले ली है।’

प्रिंसिपल ने कहा कि किताब से आसाराम का नाम नहीं हटाया गया, जो कि बहुत गलत बात है, ये प्रकाशन की गलती ही कही जाएगी। इसके साथ ही प्रिंसिपल ने कहा कि उनके द्वारा प्रकाशन से इस मामले में जरूर सवाल किए जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह किताब प्रीमियर पब्लिकेशन हाउस द्वारा छापी गई थी। बता दें कि आसाराम को नाबालिग से रेप के आरोप में जोधपुर की अदालत ने इस साल अप्रैल के माह में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आसाराम इस वक्त जोधपुर जेल में ही बंद है। उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 और बाल यौन अपराध निषेध अधिनियम (पोस्को) और किशोर न्याय अधिनियम (जेजे) के तहत दोषी ठहराया गया।

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