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‘अलीबाग से आया है क्या?’ मुहावरे पर बैन के लिए याचिका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया यह जवाब

चीफ जस्टिस नंदराजोग ने कहा, "हर समुदाय पर चुटकुले बने हैं...संता बंता चुटकुले...मद्रासी चुटकुले और उत्तर भारतीयों पर चुटकुले। मजे लीजिये...अपमानित महसूस मत कीजिये।" पीठ ने कहा, "हमें इसमें कुछ भी अपमानजनक नहीं मिला।"

Author मुंबई | July 20, 2019 9:51 AM
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, इसे अपमान के रूप में नहीं लिया जाना चाहिये। (फाइल फोटो)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ‘अलीबाग से आया है क्या?’ कहावत पर प्रतिबंध लगाने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी अपमानजनक नहीं है और इसे अपमान के रूप में नहीं लिया जाना चाहिये। याचिका के अनुसार यह मुहावरा महाराष्ट्र में आमतौर पर किसी ऐसे व्यक्ति के लिये इस्तेमाल किया जाता है, जिसे मूर्ख या बेहद भोला माना जाता हो।

चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस एन एम जामदार की पीठ ने महाराष्ट्र के अलीबाग के निवासी राजेन्द्र ठाकुर की जनहित याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति नंदराजोग ने कहा, “हर समुदाय पर चुटकुले बने हैं…संता बंता चुटकुले…मद्रासी चुटकुले और उत्तर भारतीयों पर चुटकुले। मजे लीजिये…अपमानित महसूस मत कीजिये।”

पीठ ने कहा, “हमें इसमें कुछ भी अपमानजनक नहीं मिला।” ठाकुर ने याचिका में कहा था कि कहावत “अपमानजनक और गलत है” क्योंकि इसमें अलीबाग के लोगों को निरक्षर दर्शाया जाता है। यह पहली बार नहीं है कि अदालत में मुहावरे या चुटकुले पर प्रतिबंध को लेकर याचिका दायर हुई है।

इससे पहले साल 2015 में दिल्ली की 54 वर्षीय एक सिख महिला वकील हरविंदर चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायकर सिखों पर बने 60 चुटकुलों पर पाबंदी की मांग की थी। चौधरी ने अपनी याचिका में कहा था कि इन चुटकुलों में सिखों को मूर्ख, बेवकूफ, अनाड़ी, बुद्धू, पागल, अंग्रेजी भाषा की अधूरी जानकारी रखने वाला दर्शाया जाता है।

वकील चौधरी का कहना था कि ये चुटकुले व्यक्ति के जीने के बुनियादी और सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। ऐसे में उन वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगना चाहिए जो इस तरह के चुटकुलों को प्रकाशित करती हैं। शीर्ष अदालत ने उस समय कहा था कि बहुत से लोग ऐसे हैं जो इन चुटकुलों को मजाक में लेते हैं।

यह किसी के लिए अपमान नहीं हो सकता है बल्कि ये केवल मजे के लिए कहे जाते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता वकील से कहा था कि अन्य सिख ही इसका विरोध कर सकते हैं। वकील चौधरी का कहना था कि ये चुटकुले अभिशाप की तरह हैं और इनसे छुटकारा मिलना ही चाहिए।

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