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2013 से अब तक कई बार फैली थी कादर खान की मौत की अफवाह, रामदेव के आश्रम में भी कराया था इलाज

बॉलीवुड के कॉमेडी किंग कादर खान ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। इस खबर की पुष्टि उनके बेटे सरफराज ने की और कहा - 'हमारे अब्बा दुनिया छोड़ गए है'।

कादर खान, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

बॉलीवुड के कॉमेडी किंग कादर खान ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। इस खबर की पुष्टि उनके बेटे सरफराज ने की और कहा – ‘हमारे अब्बा दुनिया छोड़ गए है’। बता दें कि करीब दो साल पहले स्वामी रामदेव के हरिद्वार स्थित पतंजलि केन्द्र में भी उपचार के लिए दाखिल रहे थे। पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि तब उनकी तबीयत में काफी सुधार हुआ था। बता दें कि कादर खान की मौत की अफवाह भी कई बार सोशल मीडिया पर उड़ी है। हालांकि इस बार ये सच साबित हुई।

पतंजलि में हुआ था उपचार: पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने बीबीसी को बताया कि कादर खान करीब दो साल पहले बाबा रामदेव के हरिद्वार स्थित पतंजलि केन्द्र में उपचार के लिए दाखिल हुए थे। तब उनके बेटे भी उनके साथ थे। हम लोगों ने उस वक्त कादर खान की खूब सेवा की थी। वो हम सभी के बीच काफी खुश भी थे। उस वक्त उनको बोलने में भी काफी दिक्कत होती थी साथ ही साथ चलने में भी काफी दिक्कत होती थी। हमारे इलाज से उन्हें काफी आराम मिला था और वो ठीक से बोलने लगे थे और साथ ही साथ वो खड़े भी होने लगे थे।

निधन की अफवाहें: बता दें कि ये कादर खान के निधन की अफवाह कई बार सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। जानकारी के मुताबिक पहली बार ये खबर फरवरी 2013 में आई थी। उसके बाद मार्च- अप्रैल 2016 में फिर ऐसी खबर आई थी। 2016 के बाद 2017 में दो बार फिर ऐसा हुआ था। वहीं अप्रैल 2018 में भी ऐसी ही अफवाह उड़ी थी कि कादर खान नहीं रहे।

जब कादर खान ने कहा कि – मैं जिंदा हूं, मेरी मौत की अफवाहें न फैलाएं: कुछ समय पहले तक कादर खान और उनका परिवार इन अफवाहों से इतना परेशान हो गए थे कि कुछ समय पहले खुद कादर खान ने कहा था कि मैं जिंदा हूं। मेरे बारे में मौत की अफवाहें न फैलाएं, इससे मेरे परिवार को तकलीफ पहुंचती है। एक दिन तो सभी को जाना है, मौत से किसी को छुटकारा नहीं मिलता। मैं आप सभी की दुआओं को लेकर जाउंगा।

क्या थी बीमारी: कादर खान की बीमारी को लेकर आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि उनकी मूल बीमारी अलजाइमर थी। दुनिया में अलजाइमर को जड़ से खत्म करने का कोई इलाज नहीं है। इसके साथ ही बालकृष्ण कहते हैं कि वो हमारे यहां करीब 10-15 दिन रुके थे हालांकि मैं उनको पहले से नहीं जानता था लेकिन उनका व्यवहार बड़ा अच्छा था। वो काफी मस्त मौला आदमी थे। उनके पास कई किस्से रहते थे। गौरतलब है कि कादर खान को प्रोग्रेसिव सुपरन्यूक्लियर पाल्सी डिसऑर्डर नाम की बीमारी थी जिसमें चलने में दिक्कत होती है। इसलिए कादर खान पिछले कुछ सालों से व्हीलचेयर पर थे।

 

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