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भाजपा की पेशकश और कुलदीप विश्नोई की दुविधा

कुलदीप ने राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग करके ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अब अधिक दिनों तक कांग्रेस का ‘हाथ’ थामे रहने के मूड में नहीं हैं।

Kuldeep bishnoi, Congress
कुलदीप बिश्नोई(फोटो सोर्स:ट्विटर/Richpal_vishnoi)।

संजीव

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का खेल बिगाड़ने वाले कांग्रेस नेता और आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई अपने भविष्य को लेकर दुविधा में फंस गए हैं। भाजपा के साथ उनकी बातचीत लगातार जारी है। भाजपा की पेशकश ने कुलदीप को पूरी तरह से दुविधा में डाल दिया है। जितना वे चाह रहे हैं, उतना भाजपा देने को राजी नहीं है।

ऐसी स्थिति में अब फिलहाल उनके सामने आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति है। हालांकि कुलदीप ने राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग करके ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अब अधिक दिनों तक कांग्रेस का ‘हाथ’ थामे रहने के मूड में नहीं हैं। कांग्रेस नेतृत्व भी कुलदीप को अधिक ‘झेलने’ के पक्ष में नजर नहीं आ रहा। इसी वजह से क्रॉस वोटिंग के तुरंत बाद पार्टी ने कुलदीप को कांग्रेस वर्किंग कमेटी के विशेष आमंत्रित सदस्य सहित सभी पदों से हटा दिया था।

भाजपा से जुड़े अंदरुनी सूत्रों का कहना है कि कुलदीप बिश्नोई को पेशकश की गई है कि वे आदमपुर से इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ें। इसके बाद सरकार उन्हें कैबिनेट में शामिल करने को तैयार है। वहीं कुलदीप हिसार लोकसभा क्षेत्र, आदमपुर विधानसभा के अलावा तीन-चार और हलकों से अपने समर्थकों के लिए आने वाले चुनावों में टिकट की गारंटी चाहते हैं।

भाजपा आलाकमान यह पहले ही तय कर चुका है कि एक परिवार से एक ही व्यक्ति को चुनाव लड़वाया जाएगा। वर्तमान में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित छह ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें परिवार के दो सदस्यों को टिकट दिया गया। अगले चुनावों में इन परिवारों के लिए भी फार्मूला बना दिया है कि वे या तो खुद चुनाव लड़ें या फिर अपने परिवार से किसी को लड़वाएं। ऐसे में कुलदीप की हिसार लोकसभा व आदमपुर विधानसभा की मांग भाजपा में पूरी हो पाना दूर की कौड़ी ही दिखती है।

बेशक, इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि भाजपा भी चाहती है कि कुलदीप के रूप में एक और गैर जाट चेहरा पार्टी को मिले। साथ ही 2023 में राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी कुलदीप का फायदा भाजपा लेना चाहती है। राजस्थान में बिश्नोई वोट बैंक कई सीटों पर हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाता है। कुलदीप अपने बेटे भव्य बिश्नोई को प्रदेश की राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं।

2019 के लोकसभा चुनावों में वह इसकी कोशिश भी कर चुके हैं। कांग्रेस ने हिसार से भव्य बिश्नोई को लोकसभा चुनाव लड़वाया लेकिन वे हार गए। इन नतीजों को भी भाजपा ने कुलदीप के सामने रखते हुए यह विकल्प भी दिया है कि अगर वे चाहें तो भव्य को आदमपुर से उपचुनाव लड़वा सकते हैं। भाजपा भव्य को भी राज्य मंत्रिमंडल में शामिल करने को तैयार है। बहरहाल, कुलदीप पूरी तरह से दुविधा में फंसे हुए हैं।

जेपी नड्डा से हो चुकी मुलाकात

कुलदीप बिश्नोई राज्यसभा चुनावों से पहले ही मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से गुरुग्राम में मुलाकात कर चुके हैं। इसके बाद भी उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात और कई बार टेलीफोन पर बातचीत होने की सूचना है। भाजपा सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कुलदीप की भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात हो चुकी है। भाजपा चाहती है कि कुलदीप अब बिना किसी देरी के पार्टी में आएं। अब यह देखना रोचक रहेगा कि भाजपा के शर्तों के साथ कुलदीप कांग्रेस का हाथ छोड़ते हैं या फिर कोई और कदम उठाते हैं।

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