भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) का आम चुनाव जीत लिया। 2021 के चुनावों के मुकाबले बीजेपी को एक सीट की बढ़त भी हासिल हुई। लेकिन उसे अपने एक गढ़ में बड़ा झटका लगा। खड़िया वार्ड में बीजेपी 1972 के बाद से नहीं हारी थी। लेकिन इस बार उसे हार का सामना करना पड़ा। साथ ही कांग्रेस ने सात और सीटें जीतकर अपनी सीटों की संख्या 32 कर ली। वहीं AIMIM ने पिछली बार सात सीटें जीती थीं लेकिन इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। खड़िया के साथ कांग्रेस के पैनल ने दरियापुर, जमालपुर, मख्तमपुरा, गोमतीपुर, दानिलिमडा और बेहरामपुरा में जीत हासिल की।
2021 में दो मुस्लिम बहुल वार्डों में जीती थी टीएमसी
2021 में AIMIM ने जमालपुर की सभी चार और मख्तमपुरा की तीन सीटें जीती थीं। ये दोनों ही मुस्लिम बहुल वार्ड हैं। इसे भारत की जीत बताते हुए जमालपुर-खड़िया विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने कहा कि ऐसा लगभग 70 सालों में पहली बार हुआ है। खेड़ावाला ने दावा किया, “आज नफ़रत की राजनीति हार गई है। BJP नेताओं ने कहा था कि वे खाड़िया को दूसरा पाकिस्तान नहीं बनने देंगे, लेकिन यह इतिहास रचकर खाड़िया के लोगों ने पाकिस्तान को हरा दिया है और भारत जीत गया है। बीजेपी ने भले ही पूरा राज्य जीत लिया हो, लेकिन उन्होंने अपना गढ़ खो दिया, जहां से जनसंघ और फिर बीजेपी की शुरुआत हुई थी।”
बीजेपी के पूर्व विधायक ने दिया था बयान
स्थानीय लोगों के लिए चुनाव प्रचार के दौरान और खाड़िया में बीजेपी के सेंट्रल ऑफिस के उद्घाटन के मौके पर बीजेपी के पूर्व विधायक भूषण भट्ट ने कहा था, “चार धाम की यात्रा करने से ज़्यादा ध्यान एकजुट खाड़िया को बांटने पर है, लेकिन 1972 से 2026 तक BJP खाड़िया में जीतती रही है। इसलिए, 2026 के चुनावों में हम सब मिलकर यह तय करें कि हम खाड़िया को पाकिस्तान नहीं बनने देंगे।”
स्वर्गीय अशोक भट्ट के बेटे भूषण भट्ट (जिन्होंने लगातार आठ बार इस इलाके का प्रतिनिधित्व किया और गुजरात विधानसभा के स्पीकर रहे) के इस बयान से स्थानीय लोगों में ज़बरदस्त नाराज़गी देखी गई। हालांकि, भूषण भट्ट ने हार के लिए खड़िया वार्ड में हिंदू वोटरों की कम वोटिंग को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया, “डेमोग्राफी में बदलाव के साथ 40,000 हिंदू और 33,000 मुस्लिम वोट हैं। रविवार को, मुस्लिम वोटरों ने हिंदू वोटरों के मुकाबले ज़्यादा वोट डाले। मुस्लिम वोटर दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक बड़ी संख्या में वोट देने आए और हमारे वोटर सिर्फ़ शाम 4 बजे से शाम 6 बजे तक आए। हमने वोटरों को वोट देने के लिए मोटिवेट करने के लिए वार्ड का कोई भी हिस्सा नहीं छोड़ा, लेकिन हमारे वोटर दो घंटे में उनकी संख्या का मुकाबला नहीं कर सके।”
जीत से खुश है कांग्रेस
भूषण भट्ट ने एक ‘नई शुरुआत’ करने का वादा किया, जो खड़िया से शुरू होगी। अहमदाबाद शहर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनल पटेल ने इसे खड़िया वार्ड में कांग्रेस की ‘ऐतिहासिक’ जीत बताया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस उम्मीदवार मीना नायक, बिरजुबेन ठक्कर, ध्रुव कलापी और मोहम्मद इलियास पठान ने खड़िया वार्ड जीतकर इतिहास रच दिया है। हम और बेहतर कर सकते थे क्योंकि हम सरसपुर, बापूनगर, कुबेरनगर और शाहपुर जैसी कई सीटों पर बहुत कम अंतर से हारे थे। हालांकि AIMIM और AAP इस बार कोई बढ़त नहीं बना पाए, लेकिन कुछ निर्दलीय ने हमारे वोट-शेयर पर असर डाला है। साथ ही मुझे लगता है कि कुबेरनगर और गोमतीपुर जैसे वार्ड में ओबीसी आरक्षण में बढ़ोतरी की वजह से हमें नुकसान हुआ है।”
अहमदाबाद में जहां बीजेपी को कुबेरनगर, लांभा, अमराईवाड़ी और चांदखेड़ा में फायदा हुआ है, वहीं कांग्रेस बापूनगर, जमालपुर, मख्तमपुरा और सरसपुर रखियाल में सीटें जीत सकती है। 2021 में बीजेपी के पास 159, कांग्रेस के पास 25 और AIMIM के पास सात सीटें थीं। एक और सीट एक निर्दलीय ने जीती थी।
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गोधरा नगरपालिका के वार्ड नंबर 7 में हिंदू निर्दलीय उम्मीदवार अपेक्षा बेन सोनी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, जबकि इस वार्ड में 100% मुस्लिम मतदाता हैं।
