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पिछड़ों को साधने में जुटी बीजेपी, उत्तर प्रदेश में करेगी 220 ओबीसी सम्मेलन

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मौर्या ने कहा, "बीजेपी पिछड़ा वर्ग सम्मेलन का आयोजन इसलिए करने जा रही है ताकि पिछड़ी जाति के लोगों को बीजेपी की नीति और दृष्टिकोण से अवगत कराया जा सके।"

Author September 30, 2016 2:06 PM
पिछड़ों को साधने में जुटी बीजेपी, उत्तर प्रदेश में करेगी 220 ओबीसी सम्मेलन (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पिछड़ों को लुभाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने भी कमर कस ली है। पार्टी राज्यभर में 15 अक्टूबर से 200 पिछड़ा वर्ग सम्मेलन आयोजित करेगी। पार्टी नेताओं के मुताबिक इसके जरिए पिछड़े समाज की कई जातियों के लोगों को लामबंद करने की कोशिश होगी। पार्टी की योजना है कि दो विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर कम से कम एक संयुक्त सम्मेलन जरूर हो। इस सम्मेलन को शुरू करने से पहले पार्टी राज्यस्तरीय नेताओं का एक कार्यशाला आयोजित कर रही है, ताकि नेताओं और कार्यकर्ताओं को ठीक तरह से प्रशिक्षित किया जा सके। इसी सिलसिले में 27 सितंबर को पार्टी की पश्चिमी यूपी की इकाई के लिए एक वर्कशॉप अमरोहा में आयोजित किया गया। 28 सितंबर को फतेहपुर में कानपुर-बुंलेदखंड यूनिट के लिए कार्यशाला आयोजित किया गया। काशी क्षेत्र में गुरुवार (29 सितंबर) को कार्यशाला आयोजित की गई। अब 30 सितम्बर को अवध क्षेत्र की कार्यशाला लखनऊ में आयोजित होगी। इसी तरह 4 अक्तूबर को ब्रज क्षेत्र की कार्यशाला कासगंज में 5 अक्तूबर को गोरखपुर क्षेत्र की कार्यशाला कुशीनगर में होगी। अवध, ब्रज व गोरखपुर क्षेत्र के पिछड़ा वर्ग सम्मेलनों में में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल के शिरकत करने की संभावना है।

इस कार्यशाला में यूपी बीजेपी के महासचिव अशोक कटारिया और राज्य सचिव अमरपाल मौर्या लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। कटारिया को ही पार्टी ने पिछड़ा वर्ग सम्मेलन कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें कॉन्वेनर बनाया गया है जबकि अमरपाल मौर्या को को-कॉन्वेनर बनाया गया है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मौर्या ने कहा, “बीजेपी पिछड़ा वर्ग सम्मेलन का आयोजन इसलिए करने जा रही है ताकि पिछड़ी जाति के लोगों को बीजेपी की नीति और दृष्टिकोण से अवगत कराया जा सके।” उन्होंने कहा, “हमलोग पिछड़े वर्ग के लोगों को यह बताएंगे कि बीजेपी ही उनकी हिमायती है, बीजेपी ही उन्हें सरकार और संगठन में प्रतिनिधित्व दे सकती है।” उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर से पिछड़ा वर्ग सम्मेलन की शुरुआत कर दी जाएगी जो चुनाव तक चलेगा।

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उन्होंने बताया कि जहां सम्मेलन होगा, उस विधानसभा क्षेत्र के ओबीसी वोटर्स को ओबीसी नेताओं द्वारा बुलावा भेजा जाएगा और उन्हें पार्टी की नीतियों से अवगत कराया जाएगा। उस सम्मेलन में ओबीसी विधायक और सांसदों की मौजूदगी भी रहेगी। पार्टी नेताओं के मुताबिक, बीजेपी चाहती है कि वो पिछड़े लोगों को इस बात की जानकारी देकर उन्हें अपने पाले में करे कि बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ओबीसी चेहरा केशव प्रसाद मौर्या को नियुक्त किया। साथ ही पिछड़े वर्ग की नेता उमा भारती को केन्द्र में मंत्री बनाया गया है जबकि कल्याण सिंह को गवर्नर बनाया गया है। पार्टी यह भी बताना चाहती है कि बीजेपी ने पिछड़े लोगों का नेतृत्व करनेवाली पार्टी अपना दल और भारतीय समाज दल के साथ लोकसभा चुनावों में गठबंधन किया। इसके अलावा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जुलाई में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी द्वारा आयोजित अति पिछड़ा-अति दलित महापंचायत को भी संबोधित कर चुके हैं। पिछड़ा समाज से आनेवाली अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल को मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया है।

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पार्टी पिछड़ों को बड़े पैमाने पर एकजुट करने की कवायद में यह भी बताएगी कि बसपा छोड़कर बीजेपी में आए स्वामी प्रसाद मौर्या भी पिछड़े समाज से ताल्लुकात रखते हैं। स्वामी ने अभी हाल ही में लखनऊ में एक रैली आयोजित कर अपनी ताकत दिखाई थी। इस रैली में अमित शाह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। एक अन्य नेता ने बताया कि पिछड़ा वर्ग सम्मेलन को स्वामी प्रसाद मौर्या भी संबोधित करेंगे। दरअसल, यूपी में यादव समेत तमाम पिछड़ी जातियों का वोट बैंक पर बड़ा कब्जा है। मुलायम ने इसी रणनीति के तहत गैर यादव वोटबैंक को साधने के लिए बेनी प्रसाद मौर्या को फिर से सपा में शामिल किया तो वहीं बीजेपी तमाम दलों को छोड़कर आ रहे पिछड़े नेताओं को अपने साथ कर रही है। उधर, नीतीश कुमार भी पूर्वी यूपी में पिछड़े वर्ग को लुभाने के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं।

 

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