देश की तमाम सियासी पार्टियां खुद को बीआर आंबेडकर के करीब दिखाकर दलितों को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रयास करती रही हैं। इसी कड़ी में तमाम दलों ने बीआर आंबेडकर की जयंती और पुण्यतिथि को जोर-शोर से मानना शुरू किया है।
अब साल 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश बीजेपी ने दलित और आदिवासी वोटर्स का विश्वास जीतने के लिए कई सोशल रिफॉर्म्स पर अपना फोकस कर लिया है। यूपी बीजेपी की एससी विंग ने इस कड़ी में पूरे साल का एक कार्यक्रम तैयार किया है, जिसके तहत वह पूरे राज्य में एससी और एसटी समुदाय के एक दर्जन से ज्यादा प्रमुख समाज सुधारकों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित करेगी।
BJP के इस कैलेंडर में एक बीएसपी के फाउंडर कांशीराम का नाम भी है। पिछले साल मायावती ने 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर ताकत दिखाने के लिए लखनऊ में एक जनसभा को संबोधित किया था। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी इस मौके पर कांशीराम को श्रद्धांजलि देने के लिए इवेंट किए। भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद की पार्टी भी कांशीराम की याद में कार्यक्रम आयोजित करती है।
बीजेपी की लिस्ट में और किस-किस का नाम
बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा की लिस्ट में रामाबाई आंंबेडकर, सावित्रीबाई फुले, संत गाडगे महाराज, स्वामी अछूतानंद, झलकारी बाई, दुर्बल महाराज, संत रविदास और उदा देवी जैसे दूसरे नाम शामिल हैं। इनके अलावा बीजेपी आदिवासी नेताओं बिरसा मुंडा और तिलका मांझी को भी श्रद्धांजलि देने के लिए भी प्रोग्राम करेगी।
यूपी BJP के SC मोर्चा के अध्यक्ष राम चंद्र कनौजिया ने कहा, “हमें दलित समाज और दूसरे कमजोर तबकों का भरोसा जीतना है और दूसरों के साथ अपनापन बढ़ाना है। इसी मकसद से पार्टी इन आइकॉन को श्रद्धांजलि देने और समाज में उनके योगदान पर चर्चा करने के लिए पूरे राज्य में बड़े प्रोग्राम करेगी।”
मोदी और योगी के काम के बारे में भी बताया जाएगा
पार्टी ने प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी वाले कैलेंडर राज्य की सभी जिला इकाइयों को भेज दिए हैं। रामचंद्र कनौजिया ने कहा कि इन कार्यक्रमों में पार्टी पीएम नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकारों द्वारा SCs और STs के लिए किए गए कामों को भी हाईलाइट करेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि हर जिले में पार्टी यूनिट्स को आने वाली 23 फरवरी को संत गाडगे महाराज की जयंती मनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। संत गाडगे महाराज महाराष्ट्र से संबंध रखते हैं और धोबी समुदाय से आते हैं। 15 मार्च को कांशीराम की जयंती मनाने को लेकर उन्होंने कहा कि BSP संस्थापक ने दबे-कुचले समुदायों को अपने अधिकार मांगने, अपनी आवाज उठाने और अपनी सरकार बनाने के लिए गाइड किया था।
2024 लोकसभा परिणाम से चिंतित है बीजेपी
बीजेपी सूत्रों ने बताया कि पार्टी नेतृत्व 2024 लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद से दलित वोटर्स को लेकर चिंतित है। 2024 में सपा-कांग्रेस को यूपी में बीजेपी से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। BJP की हार के लिए की ‘संविधान बचाओ’ के नारे पर दलित वोटों का SP-कांग्रेस गठबंधन की तरफ जाना बहुत बड़ी वजह माना गया।
2024 के चुनावों के बाद एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ने ही आंबेडकर जयंती मनाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में मैराथन दौड़, सामुदायिक भोज, सेमिनार और संविधान की प्रस्तावना का पाठ शामिल है।
बिहार में भी चुनाव से पहले जदयू ने ‘भीम संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जदयू ने संविधान बनाने में आंबेडकर के योगदान को याद किया। कार्यक्रम के मंच के पीछे लगे बैनर पर आंबेडकर, मुख्यमंत्री और जेडीयू के अन्य नेताओं की तस्वीरें थीं। साथ ही उस पर यह नारा लिखा था: “हां, हम दलित हैं।”
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महाराष्ट्र में हालिया स्थानीय चुनावों में जीत के बाद भी बीजेपी रुकने के मूड में नहीं है। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष के अनुसार, पार्टी में चुनावी जीत के बाद भी ठहराव का कोई स्थान नहीं है। उनके शब्दों में, स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है और अब वे पहले से अधिक दृढ़ संकल्प के साथ मैदान में उतरेंगे। भले ही अगला विधानसभा चुनाव साढ़े तीन साल दूर हो, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर तैयारी अभी से तेज कर दी गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट
