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करप्‍शन को लेकर हिमाचल में घिरी बीजेपी, अब कर रही पार्टी के बड़े नेताओं को उतारने की तैयारी, पढ़ें पूरा प्‍लान

पुलिस भर्ती पेपर लीक घोटाले का पर्दाफाश करने सहित अफसरों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, मुख्यमंत्री कार्यालय पर उनका बचाव करने और जांच में देरी करने जैसी बातों ने पार्टी में गुटबाजी तेज कर दी है।

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कुल्लू में एक जनसभा के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हिमाचल प्रदेश के सीएम जय राम ठाकुर। (पीटीआई फोटो)

हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। सत्तारूढ़ भाजपा राज्य को फिर से जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अपने गृह राज्य में पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की आठवीं वर्षगांठ समारोह की शुरुआत करने के लिए इस राज्य को चुना है। वे 31 मई को शिमला में एक मेगा रैली करने जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भाजपा अपने बड़े नेताओं को आगे कर प्रचार-प्रसार में तेजी लाने जा रही है। हालांकि, पहाड़ी राज्य में पार्टी के लिए सबकुछ आसान नहीं है।

पुलिस भर्ती पेपर लीक घोटाले का पर्दाफाश करने सहित अफसरों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, मुख्यमंत्री कार्यालय पर उनका बचाव करने और जांच में देरी करने जैसी बातों ने पार्टी में गुटबाजी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की सभी को साथ लेने में असमर्थता, और युवाओं में बेरोजगारी को लेकर भ्रम की स्थिति से पार्टी में डर है कि कहीं भाजपा नीचे न चली जाए। क्योंकि वह सत्ता विरोधी लहर को दूर करना चाहती है।

मुखर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने इस हफ्ते की शुरुआत में इस असंतोष को साफ तौर पर जाहिर किया, जब उन्होंने आप नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भ्रष्टाचार के खिलाफ “एक अत्यंत साहसी कदम” उठाने के लिए बधाई दी। भगवंत मान ने अपने ही मंत्री को बर्खास्त कर रिश्वतखोरी के आरोपों में गिरफ्तार करवा दिया। शांता कुमार ने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति कोई सहिष्णुता नहीं होनी चाहिए और हर सरकार को पारदर्शिता अपनानी चाहिए।

हिमाचल में भ्रष्टाचार के आरोपों का विरोध करने वालों में मुख्यमंत्री ठाकुर के शीर्ष अधिकारी मुख्य सचिव राम सुभग सिंह भी हैं। सूत्रों ने कहा कि नगरोटा में वन्यजीव व्याख्या केंद्र के निर्माण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उठाया था। तब सिंह वन विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव थे।

मार्च में आयोजित कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर एक हजार से अधिक आवेदकों को 6-10 लाख रुपये में प्रश्न पत्र बेचे गए थे। जांच में कई अधिकारियों के इसमें मिलीभगत होने की बात सामने आई है। यह महामारी के बाद इस तरह की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा थी।

ठाकुर पर दबाव बढ़ने के साथ ही भाजपा के भीतर कई गुट उभरने लगे हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा, “राज्य इकाई के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री पी के धूमल, उनके बेटे (केंद्रीय मंत्री) अनुराग ठाकुर, शांता कुमार, नड्डा, राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी, जय राम ठाकुर जैसे नेताओं के समूह हैं।”

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