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धूमल पर भाजपा अब भी उलझन में, प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री में छत्तीस का आंकड़ा

कभी परिवारवाद का तो कभी 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को टिकट न देने का भाजपा का अपना फार्मूला टिकट आबंटन में आडे आ रहा है।

धूमल पर भाजपा अब भी उलझन में, प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री में छत्तीस का आंकड़ा
प्रेम कुमार धूमल ।

ओमप्रकाश ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर प्रत्याशियों के चयन पर भाजपा सर्वे ही कराती रह गई जबकि कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची में 40 के करीब टिकटों को हरी झंडी देकर भाजपा पर मनोवैज्ञानिक बढत बना ली है। बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष का हिमाचल का दौरा है। संभवत: इसके बाद ही भाजपा अपने प्रत्याशियों को पर सहमति बनाएगी।

भाजपा अभी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार धूमल को लेकर ही उलझी हुई है कि उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाए या नहीं। इसके अलावा दर्जनों सर्वे भी करवाए जा चुके है। भाजपा प्रदेश में ‘मिशन रिपीट’ को लेकर पिछले डेढ साल से ज्यादा समय से कोर कमेटी की बैठके करवा रही हैं, लेकिन अभी तक टिकटों को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है।

कभी परिवारवाद का तो कभी 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को टिकट न देने का भाजपा का अपना फार्मूला टिकट आबंटन में आडे आ रहा है। अभी तक भाजपा में माथापच्ची ही चल रही है। उधर, धूमल है कि वे सुजानपुर से चुनाव लडने को आतुर हैं। अगर उन्हें टिकट नहीं दिया गया तो उनके समर्थक चुनावों में किस ओर करवट लेंगे यह कोई नहीं जानता। पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजीव बिंदल जरूर सक्रिय हुए हैं, लेकिन उनके व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीच पर्दे के पीछे छत्तीस का आंकड़ा है।

ऐसे में यह दोनों नेता चुनावों में एक साथ कैसे उतरेंगे इसको लेकर भी संशय बना हुआ है। हालांकि, भाजपाइयों को उम्मीद है कि मोदी-शाह की जोड़ी जब हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार करने उतरेगी तो बाजी पलट जाएगी। प्रदेश में मिशन रिपीट हो जाएगा। यह उम्मीद पूरी होती है या नहीं यह तो मोदी-शाह की जोडी के हिमाचल में चुनाव प्रचार में उतरने के बाद ही पता चलेगा। वहीं, इन दिनों राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी प्रदेश में महिला मोर्चा के जगह-जगह सम्मेलन करवा रही हैं। इनमें महिलाओं की खूब भीड़ जुट रही है। हालांकि, सम्मलनों में जुट रही यह भीड़ चुनाव में वोट के रूप में तबदील हो पाती है या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है।

भाजपा आलाकमान ने राजधानी में आयोजित हुई अपनी पिछली कोर समिति की बैठक में तय किया था कि जो भी नेता जीतने की क्षमता रखता है उसी को टिकट मिलेगा। टिकट देने की यही एकमात्र शर्त होगी। इसके लिए अगर कांग्रेस व अन्य दलों से भी नेताओं को भाजपा में शामिल करना पड़े तो इससे भी गुरेज नहीं किया जाना चाहिए। नालागढ़ व कांगड़ा हलके से कांग्रेस के मौजूदा विधायकों को भाजपा में शामिल करना उसी का हिस्सा था। धर, अभी प्रदेश में सीबीआइ, आयकर और ईडी जैसी केंद्रीय एजंसियों ने दस्तक नहीं दी है, लेकिन कांग्रेस को अंदेशा है कि चुनावों के दौरान भाजपा आलाकमान इससे भी परहेज नहीं करेगा।

बीते दिनों शिमला ग्रामीण हलके से कांग्रेस विधायक व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पन्ने पर लिख दिया था कि पता चला है कि हिमाचल में ईडी व सीबीआइ दस्तक देने वाली है। उन्होंने लिखा कि उनके लिए हालीलाज के दरवाजे खुले हैं और खानपान का इंतजाम किया गया है। साफ है कांग्रेस को इन केंद्रीय एजंसियों के इस्तेमाल को लेकर पूरा अंदेशा है। खासकर उन नेताओं पर हाथ डाला जा सकता है जो ठेकेदारी से जुडे रहे हैं या जो पूर्व की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे थे।

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First published on: 07-09-2022 at 01:58:37 am