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पंजाब: स्कूली किताबों से सिखों का इतिहास हटाने का आरोप, बीजेपी बोली- गुरुओं के ज्ञान से दूर करने की साजिश

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के इस हमले पर सीएम अमरिंदर सिंह ने करारा जवाब दिया है। अमरिंदर सिंह ने कहा है कि सिलेबस में बदलाव का फैसला साल 2014 में अकाली दल की सरकार के कार्यकाल में लिया गया था।

पंजाब की सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह। (express photo)

पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार स्कूली किताबों से सिखों के इतिहास को हटा रही है? विपक्षी पार्टियों ने सीएम अमरिंदर सिंह और शिक्षा मंत्री ओपी सोनी से अपने फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुग का कहना है कि कांग्रेस सरकार लोगों की भावनाओँ के साथ खेल रही है। चुग ने आरोप लगाया कि सरकार भारत में सिख गुरुओं के गौरवशाली इतिहास को हटाने का काम कर रही है। चुग ने सरकार के इस फैसले को पंजाब के छात्रों को अपने गुरुओं और इतिहास से दूर करने की गहरी साजिश करार दिया है।

सरकार ने दिया करारा जवाबः वहीं भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के इस हमले पर सीएम अमरिंदर सिंह ने करारा जवाब दिया है। अमरिंदर सिंह ने कहा है कि सिलेबस में बदलाव का फैसला साल 2014 में अकाली दल की सरकार के कार्यकाल में लिया गया था। साथ ही इस बदलाव को लेकर सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से भी चर्चा की जा चुकी है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक के सिलेबस में बदलाव को लेकर 9 जनवरी, 2014 को एक कमेटी का गठन किया गया था। इसके बाद जब सिलेबस फाइनल किया गया तो इसे बोर्ड की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया था। मुख्यमंत्री ने बताया कि कक्षा 9 के सिलेबस पर एसजीपीसी ने सवाल उठाए थे, जिसके बाद सिलेबस में बदलाव किए गए और साल 2016 में कक्षा 9 और 10 की किताबों का प्रकाशन किया गया। वहीं कक्षा 11 और 12 की किताबों का प्रकाशन साल 2018 में करने का फैसला किया गया था।

अमरिंदर सिंह ने बताया कि जब उनकी सरकार सत्ता में आयी तो उन्होंने एसजीपीसी से सिलेबस को लेकर चर्चा की। इस पर एसजीपीसी ने पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर परमवीर सिंह को सिलेबस पर चर्चा के लिए नियुक्त किया था। प्रोफेसर परमवीर सिंह की देखरेख में ही सारा सिलेबस तैयार किया गया है। पंजाब की सीएम ने कहा कि सिख गुरुओं का पुरा इतिहास नए सिलेबस में शामिल किया गया है और यह सारा विवाद विपक्षी पार्टियों और एसजीपीसी द्वारा जानबूझकर खड़ा किया गया है।

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