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जम्‍मू-कश्‍मीर: विरोधी बता रहे बेमेल जोड़ी, पर असल में इन कारणों से हुआ बीजेपी-पीडीपी ‘तलाक’

JP PDP Alliance Over in Jammu & Kashmir Latest News: तकरीबन सवा तीन साल के बाद बीजेपी ने अचानक से पीडीपी का साथ न देने का फैसला कर लिया। इसके पीछे कई वजहें गिनाई जा रही हैं। विरोधी दल शुरुआत से ही बीजेपी-पीडीपी गठबंधन को बेमेल बता रहे थे।

Author नई दिल्‍ली | June 19, 2018 5:39 PM
महबूबा मुफ्ती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

जम्‍मू-कश्‍मीर में राजनीतिक हालात ने अचानक तेजी से करवट लिया है। बीजेपी द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद पीडीपी प्रमुख और मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। बीजेपी की समर्थन वापसी से महबूबा सरकार अल्‍पमत में आ गई थी। ऐसे में उन्‍होंने राज्‍यपाल एनएन. वोहरा को अपना त्‍यागपत्र सौंप दिया। महबूबा मुफ्ती ने पिता मुफ्ती मोहम्‍मद सईद के निधन के बाद अप्रैल 2016 में जम्‍मू-कश्‍मीर की कमान संभाली थी। बीजेपी-पीडीपी गठबंधन को शुरुआत से ही बेमेल बताया जा रहा था। दोनों दलों के बीच कई मसलों पर गहरे मतभेद उभर कर सामने आए थे। कठुआ गैंगरेप मामले में मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती के रवैये से भाजपा में गहरा असंतोष था। तमाम मतभेदों के बीच तकरीबन सवा तीन साल के राजनीतिक गठजोड़ के बाद भाजपा ने 19 जून को समर्थन वापसी की घोषणा कर दी। महबूबा मुफ्ती जम्‍मू-कश्‍मीर की पहली महिला मुख्‍यमंत्री थीं। दिसंबर 2014 में हुए चुनावों में पीडीपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी। भाजपा के खाते में 25 सीटें गई थीं और वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। गठबंधन के पास 87 सदस्‍यीय विधानसभा में तकरीबन दो तिहाई बहुमत था।

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कठुआ गैंगरेप पर दोनों दलों में गहरे मतभेद: बीजेपी और पीडीपी के बीच तकरार की खबरें कई बार सामने आ चुकी थीं। कठुआ गैंगरेप मामले में दोनों की कड़वाहट सतह पर आ गई थी। जम्‍मू-कश्‍मीर की सत्‍ता में भागीदार भाजपा के कई विधायकों ने मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। हालांकि, सीएम महबूबा इसके लिए तैयार नहीं हुईं और जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस की अपराध शाखा को मामले की जांच की जिम्‍मेदारी सौंप दी थी। इससे दोनों दलों के बीच तल्‍खी बेहद बढ़ गई थी। इसे देखते हुए हाल में ही पीडीपी-बीजेपी गठजोड़ की राज्‍य कैबिनेट में बदलाव किए गए थे। बता दें कि पुलिस द्वारा इस मामले में चार्जशीट सौंपने के दौरान काफी बवाल हुआ था।

पत्‍थरबाजों की रिहाई: जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार ने केंद्र सरकार के पास गिरफ्तार पत्‍थरबाजों को रिहा करने का प्रस्‍ताव भेजा था। मोदी सरकार ने पहली बार पत्‍थरबाजी करने वलो युवाओं को छोड़ने का फैसला किया था। इसके तहत सैकड़ों लोगों को रिहा किया गया था। हालांक‍ि, घाटी में इसके बाद भी पत्‍थरबाजी की घटना नहीं थमी। बताया जाता है कि बीजेपी और पीडीपी के बीच इस बात को लेकर भी तल्‍खी थी। राम माधव ने प्रेस कांफ्रेंस में भी स्‍पष्‍ट तौर पर कहा कि इस पीडीपी के साथ मिलकर सरकार चलाना संभव नहीं है।

कश्‍मीर केंद्रित नीतियां: महबूबा मुफ्ती कश्‍मीर घाटी पर विशेष ध्‍यान देने का आरोप लगाया जाता है। साथ ही जम्‍मू क्षेत्र को नजरअंदाज करने की भी बात कही जाती है। बता दें कि कश्‍मीर घाटी जहां मुस्लिम बहुल है तो वहीं जम्‍मू हिंदू बहुल है। बीजेपी को वोट बेस जम्‍मू में ही है।

आतंकवाद में वृद्धि: जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकी घटनाओं में लगातार वृद्धि को भी बीजेपी-पीडीपी गठबंधन के टूटने का प्रमुख वजह बताया जा रहा है। सीएम महबूबा पर आतंकी गतिविधियों को सही तरीके से काबू न करने का आरोप भी मढ़ा जा रहा है। घाटी में आए दिन आतंकी हमले होते रहते हैं, जिनमें जवानों को जान गंवानी पड़ती है।

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