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यूपी की कमान किसी नए नेता को देने से हिचकिचा रहे हैं मोदी

सूबे में विधान सभा चुनाव सिर पर हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चिंता प्रदेश के लिए ऐसा अध्यक्ष ढूंढ़ने की है जो पार्टी की शान बढ़ाए, संगठन बलवान बनाए और जीत का सेहरा भाजपा के सिर बांध दे..

Author लखनऊ | Published on: January 13, 2016 12:22 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

सूबे में विधान सभा चुनाव सिर पर हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चिंता प्रदेश के लिए ऐसा अध्यक्ष ढूंढ़ने की है जो पार्टी की शान बढ़ाए, संगठन बलवान बनाए और जीत का सेहरा भाजपा के सिर बांध दे। पार्टी नेतृत्व नए और पुराने नेताओं में से किसे चुने, इसे लेकर ऊहापोह में है। ऊहापोह का कारण यह भी है कि लगभग 200 दिनों में सूबे की कमान संभालकर संगठन को मजबूती देना किसी नए नेता के लिए गोबरधन पर्वत उठाने जैसा मुश्किल काम है। नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इन्हीं मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में भाजपा के 51 जिलाध्यक्षों के चुनाव के बाद एक सप्ताह में प्रदेशाध्यक्ष चुना जाना जरूरी है। ऐसा भाजपा का संविधान कहता है। प्रदेश में संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने की हड़बड़ी में जिस तरह बूथ स्तर से लेकर जिलाध्यक्ष तक के चुनाव में पार्टी संविधान को हाशिये पर डाल रास्ते निकाले गए, उससे प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद होने की बात वरिष्ठ कह रहे हैं। उत्तर प्रदेश से जुड़े भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी नए नेता को देने पर सशंकित हैं। उन्हें लगता है नया प्रदेशाध्यक्ष संगठन पदाधिकारियों की बैठकें ही लेने में कम से कम सौ दिनों का समय गुजार देगा। ऐसे में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले नए नेता को अध्यक्ष बनाने का जोखिम लिया जाए अथवा नहीं? बिहार की हार के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी इस बात को गंभीरता से ले रहा है।

भाजपा यहां होने वाले विधानसभा चुनाव को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों के ही लिए ‘लिटमट टैस्ट’ मान रही है। वाराणसी से सांसद होने की वजह से उत्तर प्रदेश सीधे नरेंद्र मोदी की साख से जुड़ा है। लोकसभा चुनाव में मिली सफलता और उसके बाद बिहार की हार ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को उत्तर प्रदेश के बारे में नए सिरे से रणनीति बनाने पर विवश कर दिया है।

मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी की तेजतर्रार छवि और लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी को मिली अप्रत्याशित सफलता ने उनका कद तो बढ़ाया है मगरएक बात उनके खिलाफ जा रही है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व के सामने लक्ष्मीकांत बाजपेयी की जो रिपोर्ट गई है उसमें कहा गया है कि उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष रहते निवर्तमान अध्यक्षों से तालमेल में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिससे आलाकमान नाराज हैं।

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