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सरकारी जमीन पर मस्जिद और कब्रिस्तान बनवाने का लगाया आरोप, BJP सांसद ने एलजी को सौंपी लिस्ट

भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने गुरूवार (11 जुलाई) को उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की और उन्हें शहर में ऐसे 54 कथित अतिक्रमणों की सूची दी।

Author दिल्ली | July 11, 2019 8:52 PM
बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा फोटो सोर्स- ANI

दिल्ली की सरकारी भूमि पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों का निर्माण का आरोप लगाने वाले भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने गुरूवार (11 जुलाई) को उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की और उन्हें शहर में ऐसे 54 कथित अतिक्रमणों की सूची दी। प्रवेश वर्मा ने पिछले महीने बैजल को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सरकारी जमीनों, सड़क किनारे तथा खाली स्थानों पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में तुरंत कार्रवाई की मांग की थी।

उपराज्यपाल अनिल बैजल को दिए ज्ञापन में पश्चिम दिल्ली से लोकसभा सदस्य ने दावा किया कि उन्होंने निजी तौर ऐसे इलाकों का मुआयना किया है जहां दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी), ग्राम सभा, बाढ़ विभाग, डीडीए, नगर निगमों की जमीनों पर कब्रिस्तान और मस्जिदें बनाई गई हैं। ये जमीनें पार्क, सार्वजनिक शौचालय आदि सामुदायिक सुविधाओं के लिए हैं। उन्होंने ज्ञापन में कहा, ‘‘मेरे सर्वेक्षण में पश्चिमी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र और दिल्ली के अन्य हिस्सों में सरकारी जमीनों पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों के अतिक्रमण के 54 मामलों की पहचान हुई है।’’

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वर्मा ने कथित अतिक्रमण का आधिकारिक सर्वेक्षण कराने के लिए संबंधित जिलाधिकारियों और अन्य अधिकारियों की एक समिति गठित करने की अपनी मांग को दोहराया है। वर्मा के आरोप का संज्ञान लेकर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने उनके दावे की जांच करने के लिए एक तथ्यान्वेषण समिति गठित कर दी है। सामाजिक कार्यकर्ता औवेस सुल्तान खान की अध्यक्षता वाली पांच सदस्य समिति अपना सर्वेक्षण कर रही है। खान ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम अपनी रिपोर्ट संकलित करने के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों का मुआयना कर रहे हैं। उम्मीद है कि रिपोर्ट को अगले हफ्ते के अंत तक पेश कर दिया जाएगा।’’

भाजपा सांसद के दावे पर ऐतराज जताते हुए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफर-उल-इस्लाम खान ने कहा था कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण पुरानी समस्या है लेकिन खास मजहबी समुदाय से जोड़कर इसे मुद्दा बनाना गलत है। उन्होंने कहा था कि जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है उससे ऐसा लगता है कि यह ‘एक खास समुदाय के खिलाफ माहौल’ बनाने की कोशिश है, जो अस्वीकार्य है।

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