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नहीं रहे BJP सांसद नंद कुमार सिंह चौहान, कोरोना के बाद अस्पताल में चल रहा था इलाज

उनके देहांत पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुख जताया है।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली/भोपाल | Updated: March 2, 2021 10:22 AM
नंद कुमार सिंह चौहान। (फाइल फोटोः fb/NandKumarSinghChauhan)

मध्य प्रदेश के खंडवा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद नंद कुमार सिंह चौहान का निधन हो गया है। दिल्ली-एनसीआर स्थित मेदांता अस्पताल में सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे, जिसके बाद अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर तक उनका पार्थिव शरीर एयर अंबुलेंस से खंडवा हवाई पट्टी लाया जाएगा, जिसके बाद उसे बुरहानपुर ले जाया जाएा। माना जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार शाहपुर में ही होगा, जो कि उनका गृह नगर है।

वह कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। इस बात का अंदाजा उनके एक ट्वीट से भी लगाया जा सकता है, जो खुद उन्होंने 11 जनवरी को किया था। ट्वीट कर जानकारी दी थी कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। लिखा था- प्रिय साथियों मैं अस्वस्थ महसूस कर रहा हूं। आज कोरोना की जांच कराने के बाद मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बीते दिनों जो भी मेरे संपर्क में आए हों, वे कृपया अपनी जांच जरूर करा लें।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया कि डॉक्टरों की मानें तो चौहान के फेफड़े 90 फीसदी तक संक्रमित हो चुके थे। उन्हें दिल्ली के अस्पताल में एयरलिफ्ट कर लाया गया था।

वहीं, उनके देहांत पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुख जताया है। मंगलवार सुबह उन्होंने कहा- जाने माने नेता और नंदू भैया हमें छोड़ कर चले गए। बीजेपी ने एक कुशल कार्यकर्ता खो दिया है। वह हमारे लिए समक्ष आयोजक और समर्पित नेता थे। मेरे लिए वह निजी क्षति हैं।

एक नजर में जानिए नंद कुमार सिंह चौहान कोः आठ सितंबर, 1952 को नंद कुमार सिंह चौहान का जन्म बुरहानपुर के शाहपुर में हुआ था। पीजी की पढ़ाई के बाद उन्होंने सियासत का रुख किया। उन्होंने तब बीजेपी ज्वॉइन कर ली थी। 1978 से 1980 तक वह शाहपुर नगर पालिका अध्यक्ष रहे। फिर साल 1985 से 1996 तक भाजपा की ओर से जीते और नगर अध्यक्ष बने।

आगे 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी ने खंडवा इलाके से सांसद कैंडिडेट बनाया। किस्मत अच्छी निकली…जीते। हालांकि, कार्यकाल लगभग एक साल का ही रह सका। 1996 से 1997 तक ही इस पद पर रह पाए, जबकि तीसरी बार सांसदी का चुनाव जीतने पर वह 1999 से 2004 के बीच अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए थे।

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