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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर क्यों? बीजेपी सांसद ने कुलपति से मांगा जवाब

छात्र संघ के वर्तमान अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने जिन्ना को अविभाजित भारत का हीरो बताया। उन्होंने कहा कि साल 1947 से पहले ही जिन्ना को आजीवन सदस्यता दे दी गई थी, इसलिए उनकी तस्वीर अभी तक यूनिवर्सिटी में लगी हुई है।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाए जाने को लेकर वाइस चांसलर (वीसी) तारिक मंसूर से सफाई मांगी है। गौतम द्वारा वीसी मंसूर को खत लिखा गया है, जिसमें जिन्ना की तस्वीर लगाने को लेकर सफाई मांगी गई है। बीजेपी सांसद द्वारा लिए गए खत में पूछा गया है कि ऐसी क्या मजबूरी हो गई थी कि जिन्ना की तस्वीर लगानी पड़ गई।

गौतम का कहना है कि भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान के संस्थापक की तस्वीर लगाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, ‘अगर वह सच में किसी की तस्वीर लगाना चाहते हैं तो उन्हें महान इंसान महेंद्र प्रताप सिंह की तस्वीर लगाना चाहिए, जिन्होंने इस यूनिवर्सिटी के लिए जमीन दान की थी।’ गौतम के खत पर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजल हसन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जिन्ना के बारे में न तो आज तक पढ़ाया गया है और न ही उनसे संबंधित कोई चैप्टर है।

उन्होंने कहा कि अगर तस्वीर की बात है तो जिन्ना की फोटो यूनिवर्सिटी में साल 1938 से यानी विभाजन से पहले से ही लगी हुई है। हसन ने आगे कहा कि अगर संसद की तरफ से जिन्ना की तस्वीर को हटाने से संबंधित कोई निर्देश दिया जाता है तो उसका जरूर पालन किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने सांसद से ही उलटा सवाल कर दिया कि अभी तक पार्लियामेंट में से जिन्ना की तस्वीर क्यों नहीं हटाई गई है?

छात्रसंघ के वर्तमान अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने जिन्ना को अविभाजित भारत का हीरो बताया। उन्होंने कहा कि साल 1947 से पहले ही जिन्ना को आजीवन सदस्यता दे दी गई थी, इसलिए उनकी तस्वीर अभी तक यूनिवर्सिटी में लगी हुई है। उस्मानी ने सांसद के सवाल से भड़कते हुए कहा कि कल को बीजेपी चाहे तो बीआर अंबेडकर की तस्वीर लगाने को लेकर भी सवाल खड़ा कर सकती है। उस्मानी ने कहा कि इस मामले में विश्वविद्यालय के वीसी को खत न लिखते हुए गौतम को छात्रसंघ को तलब करना चाहिए था, क्योंकि जिन्ना की तस्वीर एएमयू के स्टूडेंट हॉल में लगी हुई है।

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