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बीजेपी सांसद ने किया दलित आरक्षण का विरोध, बोले- सिर्फ दो पीढ़ियों को मिले लाभ

भाजपा सांसद सीपी ठाकुर ने दलित आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इसका फायदा सिर्फ दो पीढि़यों को दिया जाना चाहिए।

भाजपा नेता सीपी ठाकुर ने दलित आरक्षण का विरोध किया। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

बिहार में इन दिनों आरक्षण को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कोई दलित आरक्षण के विरोध में बयान दे रहे हैं तो कोई सवर्णों को भी आरक्षण देने की मांग करने लगे हैं। राजनीतिक मंच से निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सीपी ठाकुर ने रविवार को दलित आरक्षण का विरोध करते हुए आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने की मांग की। सीपी ठाकुर ने कहा कि, “दलितों की सिर्फ दो पीढ़ियों को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिया जाना चाहिए, और इसके बाद उन्हें आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। दलित आईएएस अधिकारी के बेटे को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।” उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग करते हुए कहा कि, “आज देश में सवर्णों की हालत काफी खराब हो चुकी है। इस समाज के पिछड़े लोगों को भी आरक्षण मिलना चाहिए।” यह पहली बार नहीं है जब भाजपा सांसद ने आरक्षण को लेकर इस तरह का बयान दिया है। इससे पहले भी वे जाति आधारित आरक्षण को समाप्त करने की वकालत कर चुके हैं। वे आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने के पक्ष में हैं।

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वहीं, दूसरी ओर एनडीए के घटक दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने एक राजनीतिक मंच से निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की मांग की। उन्होंने कहा कि, “सरकारी क्षेत्र में नौकरियां कम हो रही है। इसलिए निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के कोलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे लोगों के अधिकार का हनन हो रहा है। जज अपना उत्तराधिकारी चुनते हैं। दलित, पिछड़े, आदिवासी और गरीब सवर्ण के मेधावी बच्चे जज नहीं बन सकते हैं। यह संविधान का उल्लंघन है। इसलिए इस प्रणाली में भी बदलाव होना चाहिए।”

इससे पहले जदयू नेता ऋषि मिश्रा ने कहा था कि, “आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को भी आरक्षण मिलना चाहिए। हमें अगली पीढ़ी के लिए भी सोचना चाहिए।” ऋषि मिश्रा के बयान पर बिहार सरकार में कृषि मंत्री प्रेम कुमार, पिछड़ा-अतिपिछड़ा मंत्री ब्रिज किशोर बिंद, परिवहन मंत्री संतोष निराला, जदयू प्रवक्ता संजय सिंह सहित कई नेताओं ने सहमति जताई। वहीं जदयू नेता श्याम रजक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि, “जो लोग सवर्ण आरक्षण की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले संविधान को समझना चाहिए।” इन सब के बीच राजद ने इसे जदयू का राजनीति स्टंट बताते हुए कहा कि ऐसा कर सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है।

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