ताज़ा खबर
 

चुनाव से पहले प. बंगाल में भाजपा के लिए जमीन तैयार करेंगे असीमानंद? प्रदेश अध्‍यक्ष करेंगे बात

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए स्वामी असीमानंद को काम सौंप सकती है। स्वामी असीमानंद हिंदुत्व के प्रचारक के तौर पर जाने जाते हैं और इस हफ्ते की शुरुआत में ही मक्का मस्जिद धमाका मामले में अदालत से बरी हुए हैं।

Author Updated: April 20, 2018 10:13 AM
स्वामी असीमानंद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक अदालत ने सोमवार को 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में दोषमुक्त कर दिया।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए स्वामी असीमानंद को काम सौंप सकती है। स्वामी असीमानंद हिंदुत्व के प्रचारक के तौर पर जाने जाते हैं और इस हफ्ते की शुरुआत में ही मक्का मस्जिद धमाका मामले में अदालत से बरी हुए हैं। पीटीआई के अनुसार स्वामी असीमानंद को लेकर बीजेपी की योजना की जानकारी पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार (19 अप्रैल) को दी। पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने पीटीआई को बताया- ”मैं व्यक्तिगत रूप से स्वामी असीमानंद को लंबे समय से जानता हूं। मैं उनसे बात करूंगा और उन्हें पश्चिम बंगाल लाने की कोशिश करूंगा ताकि वह यहां काम कर सकें। उन्होंने लंबे समय तक बंगाल में आदिवासियों के बीच काम किया है। वह हमें कई तरह से मदद कर सकते हैं।” विशेष आतंकवाद विरोधी अदालत ने सोमवार (16 अप्रैल) को 66 वर्षीय स्वामी असीमानंद और चार अन्य को 2007 के मक्का मस्जिद धमाका मामले में बरी कर दिया था।

अदालत ने अभियोजन पक्ष के द्वारा केस के आरोपियों के खिलाफ एक भी आरोप सिद्ध न किए जाने पर उन्हें बरी कर दिया था। असीमानंद के छोटे भाई सुशांत सरकार वर्तमान में हुगली से बीजेपी के सचिव हैं। सुशांत सरकार ने कहा कि अगर उनके भाई राज्य में काम संभालते हैं तो उन्हें खुशी होगी। सुशांत सरकार ने पीटीआई से कहा- ”हमारा पूरा परिवार संघ परिवार के लिए समर्पित है। अगर मेरे भाई बंगाल आते हैं और यहां काम करना चाहते हैं तो हम बहुत खुश होंगे।”

स्वामी असीमानंद का जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के कामारपुकार स्थित नाबा कुमार सरकार के घर हुआ था और उन्होंने 1971 में विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री की थी। असीमानंद अपने ज्वलंत भाषण और अल्पसंख्यक विरोधी रुख रखने के लिए जाने जाते हैं। वह स्कूल के दिनों से ही दक्षिणपंथी समूह के साथ जुड़ गए थे। राज्य के पुरुलिया और बांकुरा जिलों में वनवासी कल्याण आश्रम में वह पूर्ण कालिक कार्य कर रहे हैं। यह वही आश्रम हैं जिसे 1981 में नाबा कुमार ने स्वामी असीमानंद के नाम कर दिया था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ीं, जमीन पर ईडी ने लगाया अपना बोर्ड
2 तमिलनाडु: डॉ. कलाम के स्‍कूल की बिजली कटी, गांववाले बोले- सरकार ने ली थी जिम्‍मेदारी
3 राजस्‍थान: अपहरण के बाद कई शहरों में ले जाकर किया महिला का बलात्‍कार