दिल्ली और रांची में युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद विपक्ष को एक मौका नजर आ रहा है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने ‘स्कूल ठीक करो’ (ग्रामीण सरकारी स्कूलों को ठीक करो) अभियान शुरू कर दिया है। ऐसे में बीजेपी के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार Gen Z से जुड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, गठबंधन सरकार का हर मंत्री युवाओं से जुड़ने के तरीकों पर अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है।
इस सप्ताह देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए पांच पहल की घोषणा की है। इनमें छात्राओं को हर महीने 2,000 रुपये देने के प्रस्ताव से लेकर फिल्मों के जरिए Gen Z से जुड़ने की योजना तक शामिल है।
BJP के एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “Gen Z अब हमारी सबसे बड़ी चिंता बन गया है और हमारे पास अभी ऐसा कोई पक्का तरीका नहीं है, जिससे हम उनसे प्रभावी ढंग से जुड़ सकें।”
फड़नवीस ने सभी विभागों को युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने का निर्देश दिया है। उन्होंने मंत्रियों से यह भी कहा है कि नई नीतियां और योजनाएं बनाते समय Gen Z के हितों को ध्यान में रखा जाए। Gen Z में 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोग शामिल हैं और अनुमान है कि वे राज्य की आबादी का करीब 25 प्रतिशत हैं।
एक अधिकारी ने कहा, “जो स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहा है, वह सामाजिक क्षेत्र पर ज्यादा जोर दिया जाना है।” मंत्रियों का ध्यान अब बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों से आगे बढ़कर उन बुनियादी सुविधाओं पर भी है, जिन पर सीजेपी जोर दे रही है। इनमें शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।
युवाओं से जुड़ने की पांच पहल
राज्य के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि सरकार छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें हर महीने 2,000 रुपये ‘पॉकेट मनी’ देने पर विचार कर रही है। पाटिल ने कहा कि छात्रों को बिना किसी डर के सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों के परिसरों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने छात्रों और कुलपतियों या कॉलेज के प्रोफेसरों के बीच नियमित बातचीत पर भी जोर दिया।
राज्य के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार ने कहा है कि सरकार Gen Z को आकर्षित करने के लिए खास मराठी फिल्मों के निर्माण का खर्च उठाएगी। इन फिल्मों में आधुनिक तकनीक, विजुअल इफेक्ट्स और Gen Z को पसंद आने वाले विषय शामिल होंगे। शेलार ने कहा है, “फिल्म बनाने में होने वाला आर्थिक बोझ सरकार निर्माताओं के साथ मिलकर उठाएगी।”
सरकार 15 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं को अपने ‘मिट्टी बचाओ और पानी बचाओ’ अभियानों से जोड़ने की भी योजना बना रही है। शुक्रवार को मृदा और जल संरक्षण मंत्रालय ने राज्य के सभी 36 जिलों में ‘पानी के लिए चलो’ अभियान की घोषणा की। इसमें हर प्रतिभागी को इस विषय पर 30 से 60 सेकंड की Instagram रील बनानी होगी। सबसे अच्छी रील बनाने वालों को पुरस्कार दिया जाएगा।
अगले महीने त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में सरकार के पास युवाओं से जुड़ने का एक और मौका है। शेलार ने कहा, “अब हमें त्योहार में ज्यादा समन्वय लाने, गतिविधियों और कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने, उनके बारे में वैज्ञानिक तरीके से आंकड़े जुटाने और उन्हें दुनिया के सामने पेश करने की जरूरत है।
हमारी योजना और आयोजन इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए। पिछले साल तक सरकार की भूमिका मुख्य रूप से अनुमति देने तक सीमित थी। लेकिन अब जब इस त्योहार को ‘राज्य महोत्सव’ का दर्जा मिल गया है, तो सरकार इसकी आयोजक भी है।”
इन युवाओं तक पहुंच बनाने वाली पहलों के अलावा महाराष्ट्र सरकार ने नशे के खिलाफ अपने अभियान में भी बदलाव किया है। युवाओं में नशे की लत से निपटने के लिए इस अभियान को पूरे राज्य में दोबारा शुरू किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि नशे की समस्या ग्रामीण इलाकों तक भी पहुंच गई है और वह इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। संबंधित विभागों को महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने के लिए कदम उठाने को कहा गया है। इसके तहत हर अस्पताल में नशा-विरोधी प्रकोष्ठ बनाने का आदेश दिया गया है।
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केंद्र की मोदी सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंत्रियों की पहुंच बढ़ाने और जनता से जुड़ाव पर लगातार जोर दे रही है। बुधवार, 19 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्रियों को पिछले साढ़े तीन महीनों के दौरान चारों सोशल मीडिया (एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन) प्लेटफार्मों पर उनकी गतिविधियों का पूरा ब्योरा और प्रदर्शन का विश्लेषण दिया गया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
