एमपी भाजपा प्रभारी ने सुनाई खरी खोटी, बोले: 25-30 साल से सांसद-विधायक रहने वाले भी मौका न मिलने का रोना रोते हैं

मध्यप्रदेश बीजेपी प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने उन नेताओं को नालायक कहा है जो कई साल से सांसद विधायक रहे हैं, लेकिन अभी भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। राव ने ये बातें भोपाल में पार्टी के पिछड़ा वर्ग सेल के पदाधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में कही।

Muralidhar Rao bjp
मध्यप्रदेश के असंतुष्ट सीनियर नेताओं पर प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव की दो टूक (फोटो-@PMuralidharRao)

मध्यप्रदेश में सीनियर बीजेपी नेताओं को प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने दो टूक में पद की लालसा नहीं रखने के लिए कह दिया है। मंत्री और पार्टी में बड़े पद की चाह रखने वाले प्रदेश के नेताओं के लिए ये किसी झटके से कम नहीं है।

मध्य प्रदेश भाजपा प्रभारी मुरलीधर राव ने कई बार सांसद और विधायक चुने जाने के बावजूद नाखुश रहने वाले नेताओं को नालायक कहा। राव गुरुवार को भोपाल में पार्टी के पिछड़े वर्ग के पदाधिकारियों के साथ आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।

राव ने कहा, “अगर कोई तीन, चार या पांच बार सांसद या विधायक चुने जाने के बाद कहता है कि उसे पर्याप्त मौके नहीं मिले, रोते रहते हैं, मैं तो ऐसे लोगों को नालाक कहूंगा।” राव ने आगे कहा कि छोटे जगहों पर एक ही पार्षद पांच-पांच बार से बैठे हुए हैं, ये सब क्या है। राव उन नेताओं की ओर इशारा कर रहे थे, जो शिवराज सरकार में मंत्री पद ना मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। राव के इस बयान के बाद से प्रदेश के सीनियर नेताओं के बीच हलचल मची हुई है।

मुरलीधर ने कहा कि ये नेता गुस्सा निकालने के लिए अपनी ही पार्टी को घेर लेते हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राव ने कहा कि दलितों का सशक्तिकरण ही भविष्य के लिए भाजपा का एकमात्र एजेंडा है। उन्होंने कहा कि दलितों की शिक्षा और रोजगार से संबंधित अधूरे कार्य, यदि कोई हों, तो उसे पूरा किया जाना चाहिए।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राव ने कहा कि सबसे पुरानी पार्टी ने पंचायत से संसद तक सरकार को संभाला था, लेकिन अब विफल है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश में किसी पार्टी को दलितों की परवाह है, तो वह भाजपा है। इस दौरान राव ने दलित समुदाय के बुद्धिजीवियों और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी बात की।

पिछले साल ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिसके बाद फिर से बीजेपी ने प्रदेश में सरकार बना लिया था। शिवराज सिंह चौहान की इस सरकार में सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं को ज्यादा महत्व मिला और कई पूर्व मंत्री, कैबिनेट में जगह पाने से चूक गए थे।

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