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भाजपा की सीमांचल पर नजर

भारतीय जनता पार्टी उत्तर बिहार खासकर सीमांचल में अपनी पैठ कैसे मजबूत करे, इसको लेकर किशनगंज में गहन मंथन चला। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक किशनगंज में करने का खास मकसद है।

Author भागलपुर | May 6, 2017 01:19 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

गिरधारी लाल जोशी
भारतीय जनता पार्टी उत्तर बिहार खासकर सीमांचल में अपनी पैठ कैसे मजबूत करे, इसको लेकर किशनगंज में गहन मंथन चला। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक किशनगंज में करने का खास मकसद है। इस इलाके में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा भी भाजपा के लिए पुराना जरूर है। इस इलाके में 70 फीसद आबादी मुसलिम है। इसलिए भाजपा यहां तीन तलाक का मुद्दा असरदार ढंग से उछालना चाहती है। साथ ही लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2019 में एनडीए की पैठ मजबूत करना। तीन रोजा बैठक में जिलों के अध्यक्ष, संगठन प्रभारी, प्रदेश पदाधिकारी, विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री शरीक हुए। पार्टी के रणनीतिकारों से बातचीत में यह साफ हुआ कि इनके सामने मिशन 2019 लोकसभा का चुनाव भी ख़ास मुद्दा है। दरअसल बीते लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटों पर एनडीए को 31 सीटें भले मिली हों। मगर भाजपा को सीमांचल की चारों सीट किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार पर करारी हार का सामना करना पड़ा।

इतना ही नहीं, कोशी की मधेपुरा और सुपौल सीट पर भी एनडीए को शिकस्त खानी पड़ी। और तो और भागलपुर और बांका सीट भी हाथ से निकल गई। मसलन भागलपुर और आसपास के इलाका पर भाजपा की मोदी लहर बेअसर रही। लिहाजा यह भाजपा शीर्ष के लिए घोर चिंता का विषय है। इसके बाद 2015 में बिहार विधानसभा में जी तोड़ कोशिश के बाद भी मिली पराजय ने भाजपा आलाकमान की नींद ही उड़ा दी। उस वक्तप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ताबड़तोड़ सभाएं की थीं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड चुनाव में मिली शानदार जीत और साथ में बनी गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार। फिर महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, ओड़ीशा में पंचायत चुनाव की सफलता और दिल्ली एमसीडी चुनाव की मिली कामयाबी ने भाजपा के विजय रथ को जरूर बढ़ाया है।

तभी किशनगंज में पारित अपने राजनैतिक प्रस्ताव में भाजपा को दुनिया का सबसे बड़ा संगठन करार दिया है और इसका श्रेय नरेंद्र मोदी और अमित शाह को दिया है। मगर बिहार की बात आते ही भाजपा नेताओं के चेहरे की मायूसी देखते ही बनती है। इस बीच प्रदेश नेतृत्व की बागडोर बदल कर नित्यानंद राय के हाथ में सौंपी गई। ये सांसद है और युवा भी। हालांकि तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे भी किसी मायने में कमजोर साबित नहीं थे। पर, नया चेहरा सामने लाकर नई कार्यसमिति का गठन कर 50 फीसद नए चेहरे शामिल करने की शीर्ष नेतृत्व की अपनी अलग सोच हो सकती है। इनकी अगुआई में कार्यसमिति की बिहार में दूसरी बैठक हुई है। इससे पहले सिवान में 21-22 जनवरी को कार्यसमिति बैठी थी।

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