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दिल्ली मेरी दिल्ली: भाजपा का ‘सपना’

कांग्रेस में जाने की खबरों के बीच अब सपना का एक नया मोड़ सामने आया जिसमें सपना चौधरी को दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ खाने की मेज पर चर्चा करते हुए दिखाया गया है।

बीजेपी में भी शामिल नहीं होगी भारतीय गायक व डांसर सपना चौधरी

-बेदिल

भाजपा का ‘सपना’

भारतीय गायक व डांसर सपना चौधरी को लेकर भाजपा के नेता एकमत नजर नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस में जाने की खबरों के बीच अब सपना का एक नया मोड़ सामने आया जिसमें सपना चौधरी को दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ खाने की मेज पर चर्चा करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद से ही पार्टी के शीर्ष नेता 30 मार्च तक बड़े चेहरों का भाजपा में आने का दम भर रहे थे। लेकिन अभी हाल फिलहाल में भाजपा का यह सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। वहीं प्रदेश गलियारों में इस कलाकार को लेकर इतनी अधिक राजनीतिक सरगर्मी तेज करवाने के पीछे एक गुट सक्रिय है और दूसरा गुट इस समय सपना चौधरी के पार्टी में आने की अटकलों को नुकसान के नजरिए से देख रहा है।

पहले आप-पहले आप

चुनावों की घोषणा होने के बाद भी भाजपा-कांग्रेस दिल्ली की सात सीटों पर फैसला नहीं कर पा रही है। ‘पहले आप-पहले आप’ के नवाबी चक्कर में यह सूची फंसी हुई। भाजपा पार्टी सूत्रों के मुताबिक दिल्ली की पहली सूची जो आलाकमान को भेजी गई थी उस सूची में सभी सांसद व संगठन के पदाधिकारियों के नाम थे। इससे नाराज होकर पार्टी ने नए सिरे से दिल्ली के नामों पर मंत्रणा शुरू की है। इसके अतिरिक्त तर्क यह भी माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के चेहरों की घोषणा के बाद भी कांग्रेस से गठबंधन की संभावनाएं बरकरार है। इसलिए भाजपा चाहती है कि इन पार्टियों से उतारे जाने वाले चेहरों को जरूर देखा जाए। इसलिए एक बार फिर से प्रत्याशियों की सूची को भाजपा ने टाल दिया है। अब संभावना जताई जा रही है कि यह सूची नवरात्र में ही आएगी।

मतलब की चुप्पी
दिल्ली पुलिस के कई जिला अधिकारी अपने गुड वर्क छपवाने के लिए उतावले दिखते हैं। पर जब कभी उनके जिले में कोई संगीन अपराध हो जाए और मामला हाई प्रोफाइल हो तो अधिकारी एकदम से चुप्पी साध लेते हैं। जानकारी शेयर करने के लिए बनाए गए वाट्सएप गु्रप में एक शब्द भी लिखने की जहमत नहीं उठाते। पिछले दिनों एक जिला पुलिस उपायुक्त ने एक घटना से जुड़ी जानकारी बिना मांगे संबंधित जिले के वाट्सएप गु्रप में शेयर कर दी। पर जब उसी जिले में दूसरे दिन एक हाई प्रोफाइल मामला सामने आया तो वह जानकारी देने से बचते रहे। कई बार फोन करने पर उन्होंने जानकारी दी। पर आधी-अधूरी जानकारी देकर इतिश्री कर ली। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। अधिकतर जिला अधिकारी इस प्रकार से बचते नजर आते हैं।

चुनाव से कल्याण
महीनों से खस्ताहाल नोएडा की सड़कों की एकाएक लोकसभा चुनाव से चंद दिनों पहले दुरुस्त होना निवासियों के बीच चर्चा का मुद्दा बन गया है। विकास कार्यों को लेकर भले ही विपक्षी नेताओं ने अभी तक आवाज नहीं उठाई है। लेकिन महीनों से खस्ताहाल सड़कों के गड्ढों की अचानक भराई और मशीन से रिसर्फेसिंग कर दी गई हैं। गत दिनों में औद्योगिक महानगर के ज्यादातर इलाकों की सड़कों पर मरम्मत या तारकोल की नई परत बिछाने का काम जारी है। कुछ जगहों पर मशीनों के जरिए नई सड़कें बना दी गई हैं। अलबत्ता छह से आठ महीनों से बेहाल सड़कों का एकाएक लोकसभा चुनाव से पहले कैसे मरम्मत या नई बनाने के टेंडर प्रक्रिया पूरी की हो गई? अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वे केवल इसे जनता के लिए उपयोगी महत्त्वपूर्ण कार्य बता रहे हैं। हालांकि खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत करने को लेकर पिछले कई महीनों से औद्योगिक समेत रिहायशी संगठनों के पदाधिकारियों प्राधिकरण अधिकारियों से सही कराने की मांग भी की।

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