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राज्यसभा के लिए बड़े नेताओं की चर्चा से प्रदेश BJP में मायूसी

राजस्थान से राज्यसभा की चार सीटों के लिए भाजपा के केंद्रीय नेताओं की दावेदारी मजबूत होने से प्रदेश के नेताओं में मायूसी छाई हुई है। विधानसभा की संख्या बल के हिसाब से चारों सीटें भाजपा के ही खाते में जाएंगी।

Author जयपुर | May 27, 2016 3:28 AM

राजस्थान से राज्यसभा की चार सीटों के लिए भाजपा के केंद्रीय नेताओं की दावेदारी मजबूत होने से प्रदेश के नेताओं में मायूसी छाई हुई है। विधानसभा की संख्या बल के हिसाब से चारों सीटें भाजपा के ही खाते में जाएंगी। इससे ही इस बार कार्यकाल खत्म होने वाले कई केंद्रीय मंत्रियों की निगाहें राजस्थान की सीटों पर लगी हुई हैं।

प्रदेश में राज्यसभा सीटों के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही भाजपा की राजनीतिक सरगर्मियों में तेजी आ गई है। भाजपा सोमवार तक अपने उम्मीदवारों के बारे में फैसला लेगी। केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश के नेताओं को साफ कर दिया है कि दो सीटों पर तो केंद्र के मंत्रियों को ही मौका दिया जाएगा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस सिलसिले में इन दिनों दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से विचार कर रही हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, सुरेश प्रभु और निर्मला सीतारमण के साथ ही संगठन से जुडेÞ नेता रामलाल और राम माधव की निगाहें भी राजस्थान पर हैं। इनके अलावा राजस्थान के ही ओम प्रकाश माथुर, जो कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, की दावेदारी भी मजबूती से सामने आई है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश की सीटों पर दो स्थानीय नेताओं के साथ ही दो सीटों पर बड़े नेताओं को मौका देने के संकेत दिए हैं। प्रदेश के नेताओं को मिलने वाली दो सीटों पर भी एक दर्जन नेताओं ने अपनी दावेदारी जताना शुरू कर दिया है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के नेताओं में से इस बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर की दावेदारी को लेकर ही प्रदेश नेतृत्व असमंजस में है। माथुर की दावेदारी पिछली बार भी मजबूत थी, पर उनके मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से छत्तीस के आंकडेÞ के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। माथुर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का करीबी माना जाता है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विरोधी होने के कारण माथुर के पक्ष में प्रदेश भाजपा भी है। प्रदेश भाजपा पर वसुंधरा राजे समर्थक अशोक परनामी काबिज हैं। इसके चलते ही राष्ट्रीय नेतृत्व की सख्ती ही माथुर को टिकट दिला पाएगी। प्रदेश में माथुर समर्थकों की बड़ी संख्या है। माथुर पूर्व में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और लंबे अरसे तक संगठन महामंत्री रह चुके हैं। इसलिए प्रदेश में वसुंधरा विरोधी भाजपाई अब माथुर के पक्ष में खडेÞ हो गए हैं। माथुर समर्थकों ने केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बना दिया है कि इस बार टिकट तय करने में प्रदेश के नेताओं को दूर रखा जाए।

प्रदेश के दो नेताओं के टिकट को लेकर ही संगठन एकराय नहीं हो पा रहा है। टिकट तय करने में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की राय अहम होने के कारण ही उनके खेमे के कई नेता अपना जोर लगा रहे हैं। इनमें ज्यादातर नेता तो विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं। ऐसे नेताओं में रोहिताश्व शर्मा, दिगंबर सिंह, चुन्नीलाल गरासिया प्रमुख हैं। प्रदेश के नेताओं का एक खेमा जातीय आधार पर भी अपनी दावेदारी जताने में लग गया है। इस सबसे अलग हट कर आरएसएस से जुडेÞ नेता संघ के जरिये अपनी दावेदारी जताने में लगे है। संघ की मंशा है कि उससे जुडेÞ लोगों को राज्यसभा में मौका दिया जाए। इसके लिए संघ ने केंद्रीय नेतृत्व को अपने स्तर पर भी कुछ नाम सुझाए हैं।

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