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मेवालाल के भ्रष्‍टाचार पर आवाज उठाने वाले मोदी आज चुप हैं, 10 साल में एक से 12 करोड़ हो गई संपत्‍त‍ि

सबौर कृषि विश्वविद्यालय में 161 कनीय शिक्षक और वैज्ञानिकों की बहाली में धांधली का आरोप विपक्ष में रहते सुशील कुमार मोदी ने ही सदन में उठाया था। उनकी मांग पर ही राजभवन ने रिटायर जस्टिस महफूज आलम से गड़बड़ियों की जांच कराई थी।

bihar minister bjp leaderभाजपा नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी। (पीटीआई)

आखिरकार बिहार के नवनियुक्त शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी को इस्तीफा देना पड़ा। इनके मंत्री बनते ही सरकार की बुरी तरह से किरकिरी होने लगी थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस पर सवाल उठने लगे थे। वे सवालों में घिर गए थे। गुरुवार को शिक्षामंत्री का पदभार संभालने के एक घंटे के भीतर ही चौधरी ने मुख्यमंत्री को इस्तीफा सौंप दिया। यह जदयू और मेवालाल चौधरी के लिए बड़ा झटका है।

मेवालाल को नीतीश कुमार ने जदयू कोटे से मंत्री बनाया गया था। इन्होंने नीतीश कुमार के साथ 16 नवंबर को शपथ ली थी। दूसरे दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा महकमा का मंत्री बना दिया। इसके बाद इन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की बौछारें मीडिया और विपक्ष करने लगा। परत दर परत खोलती ही गई। इनकी बढ़ती जायदाद पर भी सवालों के घेरे में आ गई।

बताते हैं कि 2010 में तारापुर विधानसभा क्षेत्र से इनकी पत्नी नीता चौधरी जदयू उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल किया तो चल-अचल संपत्ति करीब एक करोड़ की शपथ देकर बताई थी। जब 2015 में मेवालाल चौधरी चुनाव लड़े तो 7 करोड़ रुपए बताई थी। और इस दफा यानी 2020 चुनाव में इजाफा होकर 12 करोड़ रुपए बताया है।

दरअसल उनपर भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के बाद पार्टी ने 2017 में निलंबित कर दिया था। वैसे इनके नीतीश कुमार से नजदीकी रिश्ते रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब भागलपुर सबौर स्थित कृषि कालेज को नीतीश सरकार ने विश्वविद्यालय का दर्जा दिया तो मेवालाल चौधरी को पहला कुलपति बनाया गया था। जब ये रिटायर हुए तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें 2015 में जदयू का टिकट दे दिया। वे तारापुर से विधायक निर्वाचित हुए।

दिलचस्प बात कि ये कुलपति बने तो इनकी पत्नी नीता चौधरी जदयू से विधायक बनी। यह 2010 की बात है। लेकिन बहाली में गड़बड़ी की बात सामने आने और राजभवन से प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विपक्षी तेवर इनके खिलाफ कड़े होने की वजह से मेवालाल चौधरी को जदयू से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार को मजबूर होना पड़ा था। 2020 चुनाव में फिर विधायक निर्वाचित होने पर मेवालाल की किस्मत का दरवाजा खुल गया। और सोमवार को नए मंत्रिमंडल के सदस्य बना दिए गए।

सबौर कृषि विश्वविद्यालय में 161 कनीय शिक्षक और वैज्ञानिकों की बहाली में धांधली का आरोप विपक्ष में रहते सुशील कुमार मोदी ने ही सदन में उठाया था। उनकी मांग पर ही राजभवन ने रिटायर जस्टिस महफूज आलम से गड़बड़ियों की जांच कराई थी। बताते है कि जज ने 63 पन्ने की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि की थी। इसी आधार पर राज्यपाल सह कुलाधिपति के आदेश पर थाना सबौर में 35/17 नंबर की एफआईआर दर्ज की थी।

इसके बाद पांच गवाहों के बयान दफा 164 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए थे। ये बहाली जुलाई 2011 में प्रकाशित विज्ञापन के माध्यम से बाकायदा इंटरव्यू प्रक्रिया के तहत की गई थी। इनके खिलाफ इस मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। इनकी अग्रिम जमानत की अर्जी एडीजे राकेश मालवीय ने रद्द कर दी थी। अग्रिम जमानत की अर्जी पर उनकी तरफ से वकील जवाहर प्रसाद साह और ममता कुमारी ने बहस की थी। पुलिस के मांगे कुर्की वारंट का भी विरोध यह कहकर किया था कि मेवालाल चौधरी जनप्रतिनिधि है। उन्हें बदनाम करने की साजिश रची गई है। अभी मंत्री बनने के बाद सवालों से घिरे मेवालाल ने फिर इसी बात को दोहराया कि उन्हें बदनाम करने की कोशिशें हो रही है।

वकीलों की दलील सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने केस की फाइल ही जिला जज को लौटा दी थी और जिला जज ने केस पटना निगरानी कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया था। इससे पहले तबके एसएसपी मनोज कुमार ने बताया था कि उनके पासपोर्ट जब्त करने के बाबत क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर लिखा था। जिसपर कार्रवाई हुई थी। पासपोर्ट पर पाबंदी लग गई थी। वरीय लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद साह बताते है कि नियम के मुताबिक भ्र्ष्टाचार मामले की सुनवाई निगरानी कोर्ट ही करता है। वहां अब भी मामला लंबित है।

फिर भी ऐसे आरोपों के बावजूद मेवालाल चौधरी की किस्मत खुली। यह बड़ी बात है। दिलचस्प बात यह है कि सदन में इसको लेकर जांच की मांग करने वाले सुशील मोदी इस बार सदन से ही नदारत कर दिए गए। वे एमएलसी है। लेकिन वे अब इसपर चुप है। इस बीच रिटायर आईपीएस अभिताभ दास की डीजीपी को लिखी चिठ्ठी ने भी एक और विवाद को जन्म दे दिया। उनकी पत्नी नीता चौधरी की मौत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने नए सिरे से जांच की मांग की है। नीता चौधरी की मौत 27 मई 2019 की रात रसोई गैस फटने से हो गई बताई जा रही है। जिसकी प्राथमिकी थाना तारापुर में दर्ज है।

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