अमित शाह के फर्जी लेटर हेड पर चाचा-भतीजे ने लिखा सिफारिशी पत्र, हरियाणा चुनाव में चाहते थे टिकट, पहुंच गए जेल

चुनाव में भाजपा से टिकट पाने के लिए हरियाणा के चाचा-भतीजे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम से फर्जी सिफारिशी पत्र बनवा लिया।

अमित शाहअमित शाह (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

विधानसभा चुनाव में टिकट पाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नाम से फर्जी सिफारिशी पत्र बनाकर मुख्यमंत्री को देने में दो लोग गिरफ्तार हो गए हैं। मामला हरियाणा के चरखी दादरी जिले का है। पुलिस उपाधीक्षक रमेश कुमार के मुताबिक यहां के सांवड़ गांव निवासी हरिओम भारद्वाज अपने भतीजे गोपाल के साथ मिलकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का किसी साइबर केफे से फर्जी लेटर हेड बनवाया और उसे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सौंप दिया। पत्र सीआईडी के हाथ लग गया तो जांच शुरू हो गई। अब मामला खुल जाने पर दोनों फंस गए। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। बौंद कलां थाना पुलिस उन्हें कोर्ट से रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

कंप्यूटर शॉप से बनवाया लेटर : पुलिस उपाधीक्षक ने बताया कि चाचा हरिओम भारद्वाज दादरी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का टिकट चाहता है। इसके लिए उसने अपने भतीजे गोपाल की मदद से 30 मई को किसी कंप्यूटर शॉप से केंद्रीय गृहमंत्री का फर्जी लेटर हेड बनवाया था। मामले में पुलिस ने एक कंप्यूटर शॉप संचालक से पूछताछ भी की है। खास बात यह है कि भतीजा गोपाल खुद हरियाणा पुलिस में नौकरी करता है।

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जन आशीर्वाद यात्रा में सीएम को सौंपा था पत्र : सितंबर को जब मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा उसके गांव सांवड़ पहुंची तो हरिओम और गोपाल ने वह फर्जी सिफारिशी पत्र सीएम को सौंपा था। पत्र में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के फर्जी हस्ताक्षर के साथ दादरी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का टिकट हरिओम भारद्वाज को देने की सिफारिश की गई। यह पत्र जब सीआईडी के हाथ लगा तो जांच के दौरान पूरे मामले का खुलासा हो गया।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने उसे पार्टी में होने से किया इंकार : मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशन शर्मा ने हरिओम को पार्टी से किसी भी तरह के जुड़ाव से साफ इंकार कर दिया। सूत्र बताते हैं कि हरिओम पिछले काफी समय से चुनाव में टिकट पाने की जुगाड़ में लगा था। भाजपा के स्थानीय कार्यक्रमों में वह सक्रिय रूप से मौजूद रहता था। उसको उम्मीद थी कि अमित शाह के फर्जी सिफारिशी पत्र को मुख्यमंत्री जान नहीं पाएंगे। साथ ही टिकट देने से इंकार भी  नहीं कर पाएंगे। अब हरिओम को टिकट तो नहीं ही मिलेगा, लेकिन फर्जीवाड़ा करने के आरोप में जेल जरूर जाना पड़ सकता है। उसके इस काम में मदद करने में भतीजे गोपाल की नौकरी भी खतरे में पड़ गई है।

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