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कांग्रेस से मिली हार पचा नहीं पा रही है भाजपा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल की जीत को भाजपाई आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो-पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल की जीत को भाजपाई आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं। पटेल की जीत कमजोर हो रही कांग्रेस के लिए तो संजीवनी साबित हुई। लेकिन भाजपा के लिए घातक। परिणाम आने के दो दिन बाद पराजित उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत चुनाव आयोग के दो मतों को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ अदालत जाने की तैयारी में हैं। भाजपा के गुजरात के प्रभारी महासचिव और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कुछ पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में यह जानकारी दी। उनके मुताबित इस तरह के मामले में पार्टी के बजाए उम्मीदवार ही अदालत जाते रहे हैं। उनका कहना है कि इस मामले में चुनाव आयोग का फैसला न नियमों के हिसाब से है न ही सबूत के हिसाब से सही है। उनका कहना है कि अगर कांग्रेस के दो वोट रद्द नहीं होते तो जीत के लिए आवश्यक मतों की संख्या 44 के बजाए 45 हो जाती यानि प्रथम वरियता मत से अहमद पटेल नहीं जीत पाते और दूसरी वरियता में ज्यादा मतों के आधार पर कांग्रेस के बागी बलवंत सिंह जीत जाते।

भाजपा नेता भूपेंद्र यादव ने बताया कि जनता दल (एकी) विधायक और एनसीपी के एक विधायक का वोट भाजपा उम्मीदवार बने राजपूत को मिला। यादव और गोयल इस बात से प्रसन्न हैं कि इस चुनाव में कांग्रेस के 57 विधायकों में से केवल 44 ने उसका साथ दिया। लेकिन इन नेताओं के पास इस सवाल का जबाब नहीं था कि जब चुनाव जीतने के लिए 45 वोट ही चाहिए तो पार्टी प्रमुख अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के लिए 46-46 वोट क्यों आबंटित किए गए। दूसरे जब भाजपा के पास संख्या नहीं थी तो तीसरी सीट को प्रतिष्ठ का सवाल क्यों बनाया। सामान्य ढंग से कांग्रेस से भाजपा में आए बलवंत सिंह राजपूत चुनाव लड़ते और और उनको भाजपा के बाकी विधायक वोट करते। अगर वे कांग्रेस के और विधायक जुटा पाते तो जीतते अन्यथा सम्मानजनक हार होती।

अमित शाह और भाजपा के अनेक रणनीतिकार अमदाबाद में कई दिनों तक जमे रहे और हर स्तर पर प्रयास करते रहे। भाजपा फिर भी सफल नहीं हो पाई। इससे उसकी राज्य सभा की सीटें नहीं घटीं बल्कि अब तो 58 सीटें लेकर वह राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकि है। भाजपा की परेशानी दूसरी थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नौ अगस्त 2014 को भाजपा की बागडोर संभाली थी। उसके बाद से उन्हें बिहार और दिल्ली विधान सभा चुनाव के अलावा कोई और पराजय नहीं झेलनी पड़ी थी। बिहार में भी नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बना ली है। इसे भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के तुरंत फैसला लेने की क्षमता की जीत माना जा रहा है।

अमित शाह के अध्यक्ष बनने के तीन साल बाद भाजपा के अभूतपूर्व विस्तार पर उनके अभिनंदन में गुजरात कांटा जैसा चुभने लगा है। शाह के अध्यक्ष बनने से पहले छह राज्यों में भाजपा की सरकार थी। इसमें तीन में भाजपा का मुख्यमंत्री और तीन में उपमुख्यमंत्री था। अब 11 राज्यों में सरकार है और नौ में भाजपा का मुख्यमंत्री और दो में उपमुख्यमंत्री है। भाजपा के सदस्यों की संख्या 11 करोड़ बताई जा रहा है। कहा जा रहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा बन गई है। भाजपा अध्यक्ष ने इस दौरान 5.6 लाख किलोमीटर की यात्रा की। केंद्र और इतने राज्यों में सरकार होने के बावजूद आज भी अमित शाह सामान्य यात्री की तरह हवाई यात्रा करते हैं। पार्टी कार्यालय या सरकारी गेस्ट हाउस में रुकते हैं। इन तीन सालों में तमाम उपलब्धियां उनके नाम हैं लेकिन एक राज्य सभा के चुनाव ने उनकी सभी क्षमताओं पर सवालिया निशान लगा दिया। इसलिए भाजपा नेता इस हार को आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं। कहने के लिए आज भी भूपेंद्र यादव और पीयूष गोयल इस चुनाव में पार्टी की क्षमता बढ़ने का दावा कर रहे थे लेकिन जिस तरह से बार-बार इसका उल्लेख किया जा रहा है, उससे भाजपा नेताओं की बेचैनी को समझा जा सकता है। भाजपा इसलिए भी परेशान है कि कुछ महीने बाद ही गुजरात विधानसभा के चुनाव होने हैं।

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