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UP चुनाव में जीत को लेकर कॉन्फिडेंट है BJP

भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। इसीलिए इस बार प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की तादाद बढ़ गई है।
Author नई दिल्ली | February 4, 2016 01:32 am

भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। इसीलिए इस बार प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की तादाद बढ़ गई है। गोरखपुर के सांसद महंत आदित्यनाथ भी अब मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल हो गए हैं। मंगलवार को गोरखपुर में हुए संत सम्मेलन में बाकायदा इसका प्रस्ताव भी पारित किया गया। अहम बात यह है कि सम्मेलन में आरएसएस के सह सरकायर्वाह कृष्णगोपाल भी मौजूद थे। संघ की तरफ से भाजपा का जिम्मा वे ही देख रहे हैं।

पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा ने हताश मनोबल से लड़ा था। नतीजतन किसी भी नेता ने खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं किया था। हालांकि तब की सत्तारूढ़ पार्टी बसपा के चुनाव हारने के लक्षण पहले ही दिखने लगे थे। भाजपा और कांगे्रस के दौड़ में न होने से कमान सपा के हाथ में आ गई थी। सियासी हालात को देखते हुए हवा इस बार भी सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ ही लग रही है। यह बात अलग है कि विकल्प कौन बनेगा, इसे लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है।

पर भाजपा को जीत का भरोसा क्यों है? राज्य भाजपा महासचिव धर्मपाल सिंह के मुताबिक इसके कई कारण हैं। सपा और बसपा दोनों की बहुमत वाली सरकारों का कामकाज लोगों ने देख लिया है। कांगे्रस का कहीं अता-पता नहीं है। सपा के खिलाफ लोगों में नाराजगी से एक तो व्यवस्था विरोधी रुझान भाजपा को लाभ देगा। दूसरे लोकसभा चुनाव में मिली चमत्कारी सफलता से साफ है कि यूपी के मतदाता इस बार भाजपा को ही मौका देंगे। बकौल धर्मपाल सिंह प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों ही यूपी के हैं। इसका भी फायदा मिलेगा। जनसत्ता से बातचीत में प्रदेश भाजपा के सबसे कद्दावर पिछड़े नेता धर्मपाल सिंह का कहना था कि सपा सरकार का समाजवाद खोखला साबित हो चुका है। मुलायम सिंह यादव लोहिया का राग अलापते हैं। लोहिया ने कांगे्रस के वंशवाद का विरोध किया था। पर मुलायम ने अपने कुनबे के दो दर्जन सदस्यों को राजनीति में अहम पदों पर बैठाकर साबित कर दिया है कि उनका समाजवाद परिवारवाद तक सीमित है। अगर आगे जाता भी है तो केवल अपनी जाति तक।
सपा और बसपा की कार्यप्रणाली में धर्मपाल सिंह कोई अंतर नहीं मानते हैं। बसपा ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया था तो सपा और आगे चली गई। सपा सरकार बदले की भावना से कार्रवाई करती है। इसके मंत्री भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं। यह विपक्ष का आरोप न होकर खुद पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का खुलासा है। विकास चौपट है।

मायावती पार्कों और पत्थरों पर पैसा बर्बाद करती थी। सूबे की जनता दोनों ही पार्टियों से उकता चुकी हैं। दोनों के मुखिया दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नाम पर वोट मांगते हैं पर सत्ता में आने पर कल्याण अपना और अपनी जाति का ही करते हैं। भाजपा नेता ने दावा किया कि राज्य में अब तक भाजपा की सरकार दो बार रही है। दोनों बार ही भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने नहीं आया। भाजपा सामाजिक समरसता में भरोसा करती है। यही वजह है कि अगड़ों और पिछड़ों ही नहीं दलितों ने भी लोकसभा चुनाव में पार्टी का साथ दिया था। राज्य के हित में विधानसभा चुनाव में भी वैसे ही नतीजे आएंगे।

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