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भाजपा पर मतदाता सूची से लाखों नाम कटवाने का आरोप

‘आप’ नेता ने कहा कि मतदाता सूची निर्वाचन प्रणाली के निष्पक्ष होने का मुख्य आधार होती है। ऐसे में मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने पर चुनाव प्रक्रिया के निष्पक्ष होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा पर राजधानी की मतदाता सूची में व्यापक गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी शह पर लाखों मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में अकेले दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में लगभग एक लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मतदाता सूची से व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ कके मामले सामने आए हैं। इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि अकेले दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से एक लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। पार्टी की ओर से दक्षिणी दिल्ली संसदीय क्षेत्र के प्रभारी और संभावित उम्मीदवार बनाए गए चड्ढा ने कहा कि भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी संभावित हार से बौखला कर अब मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम कटवाने का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला पिछले एक साल से चल रहा है।

चड्ढा ने कहा कि वे दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत दस विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों से पिछले एक साल में हटाए गए मतदाताओं की सूची के आधार पर यह आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छतरपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 7500, बिजवासन में 12 हजार और तुगलकाबाद में 6000 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। औसतन दस हजार मतदाताओं के नाम हर विधानसभा क्षेत्र से हटाए जाने के प्रमाण सामने आए हैं। चड्ढा ने कहा कि ‘आप’ समर्थकों की अधिकता वाले नगर निगम वार्ड में मतदाताओं के नाम काटे जाने की सर्वाधिक शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने इस दौरान उन मतदाताओं की शिकायतों का जिक्र किया, जिन्हें चुनाव आयोग से उनके पते पर नहीं रहने के हवाले से मतदाता सूची से नाम काटे जाने का नोटिस मिला है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने चुनाव आयोग के नोटिस को गलत बताते हुए स्थानीय अधिकारियों के समक्ष अपने पते के प्रमाणपत्र के साथ संपर्क भी किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।

‘आप’ नेता ने कहा कि मतदाता सूची निर्वाचन प्रणाली के निष्पक्ष होने का मुख्य आधार होती है। ऐसे में मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने पर चुनाव प्रक्रिया के निष्पक्ष होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह आयोग के समक्ष पूरे मामले को सबूतों के साथ पेश करेंगे। उन्होंने पिछले एक साल में मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने की मांग की।

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