ताज़ा खबर
 

‘उप्र में हिंदू जातियों के गठजोड़ का भाजपा को मिला लाभ’

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन जैसी तमाम जगहों पर मुस्लिम मत समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बंट गए।

Author March 14, 2017 1:21 PM
प्रतीकात्मक फोटो

मुस्लिम समुदाय के नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) की ऐतिहासिक सफलता की वजह तमाम हिंदू जातियों का एकसाथ आकर हिंदू वोट के रूप में परिवर्तित हो जाना रहा है। इसने मुस्लिम मतों के बंटने को भी अर्थहीन बना दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में जबरदस्त सफलता डाल दी। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने अकेले 312 सीटें जीती हैं। इनमें मुरादाबाद नगर, देवबंद, नूरपुर, चांदपुर, नानपारा और नकुड़ जैसे कुछ ऐसे इलाके भी हैं जहां मुसलमान बड़ी संख्या में रहते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन जैसी तमाम जगहों पर मुस्लिम मत समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बंट गए। हालांकि, फिर भी मुस्लिम प्रत्याशी मेरठ, कैराना, नजीबाबाद, मुरादाबाद ग्रामीण, संभल, रामपुर, स्वार-टांडा जैसे इलाकों में जीत हासिल करने में सफल रहे। कुछ मुस्लिम नेताओं ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कुछ सीटें तो मुस्लिम मतों के विभाजन के कारण भाजपा की झोली में गिरीं। लेकिन, जिस पैमाने पर भाजपा को सफलता मिली है, उससे साफ है कि अगर मुसलमान किसी एक पार्टी के साथ गए होते तो भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

HOT DEALS
  • Apple iPhone SE 32 GB Gold
    ₹ 19959 MRP ₹ 26000 -23%
    ₹0 Cashback
  • Sony Xperia XZs G8232 64 GB (Warm Silver)
    ₹ 34999 MRP ₹ 51990 -33%
    ₹3500 Cashback

समाजवादी पार्टी के पूर्व सदस्य कमाल फारूकी ने कहा कि ‘मुस्लिम मतों के विभाजन की बात एक तरह का अमूर्त विचार है।’ उन्होंने आईएएनएस से कहा, “सामान्य धारणा के विपरीत, मुसलमान एकजुट होकर किसी पार्टी को वोट नहीं देते। भाजपा हिंदू मतों को एकजुट करने के लिए इस बात को उछालती है कि मुसलमान एकजुट होकर मत देते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि मुसलमान भी किसी अन्य सामान्य मतदाता की ही तरह अपने मुद्दों व चिंताओं के आधार पर मत देते हैं।”

उन्होंने कहा, “यह संभव ही नहीं है कि उत्तर प्रदेश के मुसलमान किसी एक पार्टी को मत दें। लेकिन, वे कभी-कभी एकजुट होकर किसी एक क्षेत्र में किसी एक प्रत्याशी का समर्थन करते हैं।” वेलफेयर पार्टी आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि भाजपा की रणनीति ने मुस्लिम फैक्टर को (चुनावों में) सफतलापूर्वक निष्प्रभावी बना दिया है। इलियास ने कहा कि भाजपा ने जाटवों के अलावा बाकी सभी अनुसूचित जातियों और यादवों के अलावा अन्य सभी पिछड़ों के मत हासिल किए हैं।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और (भाजपा अध्यक्ष) अमित शाह के उदय के बाद यह नई तरह की सोशल इंजीनियरिंग देखने को मिल रही है।” पूर्व राज्यसभा सदस्य मोहम्मद अदीब ने कहा कि मोदी और शाह ‘अच्छे दिन’ की आड़ में हिंदू राष्ट्र का वादा परोस रहे हैं जिसने वस्तुत: भाजपा को हिंदू मतों को इकलौती सर्वाधिक प्रभावी इकाई में बदलने में मदद की है। उन्होंने कहा, “बीते तीन साल में मोदी सरकार की कोई ऐसी उपलब्धि नहीं है जो नजर आती हो, फिर भी लोगों ने मोदी को मत दिया। मोदी में लोग हिदू राष्ट्र की उम्मीद देख रहे हैं जिसे वह (मोदी) अच्छे दिन कहकर प्रचारित कर रहे हैं।”

कई मुस्लिम संगठनों के साझा संगठन आल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरात के अध्यक्ष नवेद हामिद ने कहा, “हम एक बहुसंख्यकवादी लोकतंत्र की तरफ बढ़ रहे हैं जहां राष्ट्रवाद को हिंदुत्व में मिला दिया गया है।”

विधानसभा चुनाव नतीजे 2017: उत्तर प्रदेश में ये चेहरे हो सकते हैं बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App