उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यादव-अहीर समुदाय के एक लोक नायक, जो अपनी बहादुरी और जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई के लिए जाने जाते हैं, उनपर यूपी की बीजेपी सरकार का फोकस है। यूपी का संस्कृति विभाग बलिया जिले के बांसडीह तहसील के हसनपुरा गांव में वीर लोरिक के सम्मान में एक 350 सीटों वाला ऑडिटोरियम और एक लाइब्रेरी बना रहा है। सरकार भोजपुर क्षेत्र में लोरिकायन के रूप में मशहूर वीर लोरिक की कहानी को पूरे राज्य में प्रमोट करने की योजना बना रही है।
सूत्रों ने कहा कि बलिया जिले में वीर लोरिक के नाम पर एक ऑडिटोरियम बनाने का आइडिया बांसडीह से बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने दिया था। संस्कृति विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “प्रस्ताव को लगभग 4.97 करोड़ रुपये का प्रशासनिक और फाइनेंशियल मंज़ूरी मिल गई है। 1.36 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है और नींव का काम शुरू हो गया है।”
वीर लोरिक के नाम पर सभागार बना रही सरकार
सरकार के प्रोजेक्ट डॉक्यूमेंट के मुताबिक 350 सीटों वाले ऑडिटोरियम में साउंड रीइन्फोर्समेंट, HD सिनेमैटिक प्रोजेक्शन, इंटेलिजेंट LED स्टेज लाइटिंग, मोटराइज्ड पर्दे और अकूस्टिक और इंटीरियर वर्क होंगे। अधिकारियों ने कहा कि इस फैसिलिटी का मकसद थिएटर, लोक संगीत, कहानी सुनाना और दूसरे कल्चरल परफॉर्मेंस होस्ट करना है, जिससे लोरिकायन को ओरल ट्रेडिशन से कंटेंपररी परफॉर्मेंस स्पेस में बदला जा सके और कहानी को छोटे ऑडियंस तक पहुंचाया जा सके।
पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने लोरिक की कहानी को उत्तर प्रदेश की कल्चरल विरासत का हिस्सा बताया है और इसके साहस, बहादुरी और अन्याय के विरोध के थीम पर ज़ोर दिया है।
प्रोजेक्ट का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह प्रोजेक्ट उस जिले में महत्वपूर्ण है जहां लोरिक की कहानी की यादव-अहीर लोक ट्रेडिशन में गहरी जड़ें हैं। बलिया में पहले से ही वीर लोरिक अखाड़ा, एक स्टैच्यू और वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम है। एक अधिकारी ने कहा, “सिर्फ़ बलिया में ही नहीं, लोरिकायन पूरे भोजपुर इलाके में एक जानी-मानी लोक कथा है। सोनभद्र ज़िले के रॉबर्ट्सगंज में एक असली लोरिक पत्थर है, जिसके बारे में माना जाता है कि वीर लोरिक ने मंजरी के लिए अपने प्यार को साबित करने के लिए इसे आधा काट दिया था।”
एक ऐसे लोक नायक के लिए जिसकी कहानी पीढ़ियों से चली आ रही है, BJP सरकार का इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने का फ़ैसला एक बदलाव दिखाता है। संदेश जा रहा है कि एक यादव योद्धा को बलिया में एक परमानेंट मंच दिया जा रहा है, वो भी ऐसे समय में जब राजनीतिक दल राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। यादव समुदाय उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण OBC ग्रुप में से एक है और पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी से मज़बूती से जुड़ा रहा है।
बलिया में सपा पड़ी थी बीजेपी पर भारी
बिहार की सीमा से लगे बलिया में सात विधानसभा सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में, तीन समाजवादी पार्टी (SP) ने, दो बीजेपी ने और एक-एक बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और बीएसपी ने जीती थीं। रसड़ा से बीएसपी के अकेले विधायक उमा शंकर सिंह की मौत के बाद बीजेपी उनकी सीट भी जीतने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी क्या कहती है?
हालांकि बीजेपी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को जाति या चुनावी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। बीजेपी की बलिया ज़िला यूनिट के अध्यक्ष संजय मिश्रा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “इसमें कोई पॉलिटिक्स शामिल नहीं है। बलिया से सोनभद्र और आस-पास के ज़िलों के लोग वीर लोरिक की बहादुरी की कहानियों से जुड़ते हैं।”
संजय मिश्रा ने कहा, “महापुरुष की कोई जाति नहीं होती। उनकी जाति का इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे जिले की विरासत हैं। हम इस पुरानी लोककथा को युवाओं के लिए एक मॉडर्न कनेक्ट देना चाहते हैं।”
वीर लोरिक की कहानी क्या है?
वीर लोरिक भोजपुरी लोक महाकाव्य लोरिकायन में मुख्य योद्धा हैं, जो पारंपरिक रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में लोक गीतों, बोलकर किए गए कामों और कहानियों के ज़रिए आगे बढ़ाए जाते हैं। लोककथाओं में उन्हें उनकी असाधारण ताकत और बहादुरी के लिए मनाया जाता है, और उन्हें एक ऐसे योद्धा के रूप में दिखाया गया है जो ताकतवर शासकों को चुनौती देता है और जाति के अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है।
कहानी का सबसे लोकप्रिय हिस्सा सोनभद्र से जुड़ी एक राजकुमारी मंजरी के इर्द-गिर्द घूमता है। लोककथा के अनुसार, लोरिक उसे एक ज़ालिम स्थानीय शासक, राजा मोलागत से बचाता है। उसे एक लड़ाई में हराता है और आखिरकार उससे शादी कर लेता है। कहानी का एक और हिस्सा सोनभद्र के मारकुंडी इलाके में वीर लोरिक पत्थर से जुड़ा है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, मंजरी के अनुरोध पर वीर लोरिक ने तलवार के एक ही वार से विशाल पत्थर को दो भागों में विभाजित कर दिया था।
यह भी पढ़ें- ‘नहीं लेंगे UPI पेमेंट’, व्यापारियों ने दुकानों के बाहर लगाए नोटिस
गाजियाबाद के व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर “UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करेंगे” के नोटिस लगाने शुरू कर दिए हैं। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
