पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए पूर्व कांग्रेस नेता और बरनाला के पूर्व विधायक केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही भाजपा ने पहली बार किसी जाट सिख चेहरे को राज्य इकाई की कमान सौंपी है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को भाजपा की नई चुनावी रणनीति और पंजाब में अपनी सामाजिक पकड़ बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भाजपा शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) से तीन दशक पुराना गठबंधन टूटने के बाद पंजाब में लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। कृषि कानूनों के विरोध के दौरान सितंबर 2020 में दोनों दलों की राहें अलग हो गई थीं। इसके बाद भाजपा को राज्य में अकेले चुनाव लड़ने पड़े और उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
केवल सिंह ढिल्लों ने सुनील जाखड़ की जगह ली है, जिनका कार्यकाल जुलाई में पूरा होना था। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पंजाब की सभी 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। हालांकि पार्टी का वोट प्रतिशत 9 फीसदी से बढ़कर करीब 18.5 फीसदी तक पहुंच गया था। चुनाव नतीजों के बाद जाखड़ ने इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसके बाद से संगठन में बदलाव की चर्चा तेज हो गई थी।
भाजपा नेतृत्व अब पंजाब में अपनी छवि को केवल शहरी हिंदू पार्टी तक सीमित नहीं रखना चाहता। यही वजह है कि पार्टी ने जाट सिख नेता केवल ढिल्लों को आगे कर सिख समुदाय और ग्रामीण वोट बैंक तक पहुंच बनाने की कोशिश शुरू की है। पंजाब में सिख आबादी करीब 58 फीसदी है, जबकि हिंदू आबादी लगभग 38 फीसदी मानी जाती है। ऐसे में भाजपा का यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
76 वर्षीय केवल सिंह ढिल्लों बरनाला जिले के तल्लेवाल गांव से आते हैं और पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह कांग्रेस में रहते हुए दो बार बरनाला से विधायक चुने गए थे। कांग्रेस संगठन में भी उन्होंने वरिष्ठ उपाध्यक्ष जैसे अहम पद संभाले। हालांकि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले टिकट विवाद के बाद उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया और बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
भाजपा में शामिल होने के बाद ढिल्लों को पार्टी ने लगातार अहम जिम्मेदारियां दीं। वह प्रदेश उपाध्यक्ष और कोर कमेटी सदस्य भी रहे। हालांकि चुनावी स्तर पर उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन संगठन के भीतर उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ बना ली। भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि ढिल्लों का अनुभव और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी पहचान पार्टी को नई मजबूती दे सकती है।
भाजपा पंजाब में लगातार कांग्रेस से आए नेताओं पर भरोसा जता रही है
दिलचस्प बात यह भी है कि भाजपा पंजाब में लगातार कांग्रेस से आए नेताओं पर भरोसा जता रही है। सुनील जाखड़ और अब केवल ढिल्लों, दोनों ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता हैं। इससे यह भी साफ होता है कि भाजपा अभी तक पंजाब में स्वतंत्र रूप से मजबूत जमीनी नेतृत्व तैयार नहीं कर पाई है और उसे दूसरे दलों से आए प्रभावशाली चेहरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
केवल ढिल्लों को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता है। वह बड़े कारोबारी होने के साथ किसान संगठनों के प्रति नरम रुख रखने के लिए भी जाने जाते रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी कई बार उनके घर के बाहर धरने पर बैठे, लेकिन ढिल्लों ने उनके लिए चाय-पानी और अन्य सुविधाओं का इंतजाम कराया था।
नियुक्ति के बाद ढिल्लों ने कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाएंगे। उन्होंने दावा किया कि 2027 में पंजाब में भाजपा का कमल खिलेगा।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के सामने असली चुनौती प्रतीकात्मक राजनीति से आगे बढ़कर ग्रामीण पंजाब में मजबूत जनाधार तैयार करने की है। अकाली दल से अलग होने के बाद पार्टी अभी तक राज्य में अपने दम पर बड़ा चुनावी प्रदर्शन नहीं कर पाई है। ऐसे में केवल ढिल्लों की नियुक्ति को 2027 की चुनावी तैयारी के बड़े प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली और केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब की कमान, बीजेपी ने घोषित किए 4 नए प्रदेश अध्यक्ष
बीजेपी ने चार राज्यों के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी मिली है। हर्ष मल्होत्रा दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष होंगे, तो वहीं केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब की कमान मिली है। अर्चना गुप्ता को हरियाणा और अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
