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मिशन 2019: भाजपा के लिए यूपी अहम, हाई कमान ने बनायी रणनीति, इन पर है ‘खास नजर’

मिशन 2019 के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने के विशेष रणनीति तैयार की है। करीब 20 वर्तमान सांसदों को टिकट काटा जा सकता है या उनके क्षेत्र बदले जा सकते हैं। इसके साथ ही योगी कैबिनेट के सदस्यों को लोकसभा चुनाव में उतारा जा सकता है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

आगामी लोकसभा चुनाव में अब कुछ महीने ही शेष रह गए है। भाजपा मिशन 2019 को लेकर अभी से ही पूरी तैयार में जुट गई है और फिर से 2014 लोकसभा चुनाव की तरह अपने प्रदर्शन को दोहराना चाहती है। भाजपा की नजरें एक बार फिर जीत के लिए उत्तर प्रदेश पर जमी हैं। यही वजह है कि पार्टी देश के सबसे बड़े राज्य में कड़ी मेहनत कर रही है। पार्टी ने इसके लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। खबरें आ रही हैं कि आतंरिक सर्वे के बाद भाजपा अपने पिछले 20 सांसदों का टिकट काटकर उनके स्थान पर दूसरे प्रत्याशियों को मौका दे सकती है। दरअसल, पिछले चुनाव में यूपी की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल के उम्मीदवारों की जीत हुई थी। पांच सीटों पर समाजवादी पार्टी और दो पर कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। मायावती की बहुजन समाज पार्टी का खाता भी नहीं खुुला था। भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने में उत्तर प्रदेश के नतीजों का अहम रोल रहा था। अब एक बार फिर भाजपा उसी परिणाम की अपेक्षा कर रही है। यही वजह है कि पिछले महीने भाजपा संगठन के महासचिव राम लाल ने लखनऊ के अवध क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि, “उन्हें और कड़ी मेहनत करने की जरूरत है ताकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के ‘मिशन 73’ के लक्ष्य को एक बार फिर से प्राप्त किया जा सके।”

द प्रिंट के अनुसार, उत्तर प्रदेश भाजपा के सूत्रों ने बताया कि, “योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट में शामिल कुछ मंत्रियों को लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाने की योजना थी। यह सत्ता विरोधी लहर के प्रभाव को कम कर देगा। तथ्य यह है कि नए उम्मीदवार परिचित चेहरे भी होंगे। इससे चुनाव में मदद मिलेगी।” उत्तर प्रदेश भाजपा के एक पदाधिकारी कहा कि, “कुछ मंत्रियों ने चुनाव लड़ने के लिए रुचि दिखाई है। हम कुछ अन्य लोगों के लिए भी योजना बना रहे हैं। हालांकि, अंतिम फैसला हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा लिया जाएगा।”

इन नेताओं के नाम की है चर्चा: राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इलाहाबाद और फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। सिंह पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र हैं और अभी इलाहाबाद पश्चिम से विधायक हैं, जो फूलपुर लोसकभा क्षेत्र के अंदर आता है। 2014 लोकसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य ने फूलपुर सीट से चुनाव जीता था, लेकिन 2017 में उनके उपमुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट खाली हो गई थी। बाद में हुए उपचुनाव में भाजपा ने इस सीट को खो दिया था।
स्टाम्प और नागरिक विमानन मंत्री नंद गोपाल नंदी भी इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। 2014 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। उसके बाद वे 2017 में भाजपा में शामिल हो गए थे और इलाइबाद दक्षिण से विधायक चुने गए हैं।
सात बार से विधायक और औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना कानपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने 2009 में यहां से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार श्रीप्रकाश जायसवाल से हार गए थे।
मथुरा से विधायक और उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, जहां से अभी हेमा मालिनी सांसद हैं। राज्य के भाजपा नेताओं को लगता है कि हेमा मालिनी के खिलाफ जनता में आक्रोश है। ऐसी स्थिति में यहां से उम्मीदवार बदलने की आवश्यकता है।

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