बीजेपी चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी के काम करने के तरीके को लेकर पार्टी के अंदर नाराज़गी बढ़ती दिख रही है। खबर है कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी अतुल गर्ग ने पार्षदों की बार-बार की शिकायतों के बाद नाराज़गी जताई है कि मेयर कॉल नहीं उठा रहे हैं या पार्टी के लोगों को जवाब नहीं दे रहे हैं।सूत्रों ने बताया कि मामला तब और बढ़ गया जब अतुल गर्ग (गाजियाबाद से सांसद) खुद एक बार मेयर से बात नहीं कर पाए, जब वह चंडीगढ़ में थे।
मेयर से नाराज हैं बीजेपी पार्षद
पार्टी के सूत्रों ने आगे कहा कि कई बीजेपी पार्षदों ने अतुल गर्ग से संपर्क किया था और आरोप लगाया था कि सौरभ जोशी से संपर्क नहीं हो पा रहा है और यहां तक कि रेगुलर सिविक और वार्ड से जुड़े मामलों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कथित तौर पर शिकायतें तब और बढ़ गईं जब कई पार्षदों ने बताया कि बार-बार फॉलो-अप के बावजूद उनके काम और सिफारिशें पेंडिंग हैं।
अतुल गर्ग ने क्या कहा?
सूत्रों ने आगे कहा कि अतुल गर्ग की नाराज़गी के बाद सौरभ जोशी ने उनसे कहा कि कभी-कभी वह मीटिंग के बीच में होते हैं, जिसकी वजह से वह पार्षदों के मुद्दों पर जवाब नहीं दे पाते हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अतुल गर्ग ने कहा, “आमतौर पर कुछ लोगों की बात हो जाती है, कुछ लोग कहते हैं कि वे उनसे (जोशी) कॉन्टैक्ट नहीं कर पा रहे हैं। मैंने बाद में एक अलग नंबर से भी कॉन्टैक्ट किया और उन्होंने कॉल उठाया। मैंने मीटिंग में बस इतना कहा कि सभी को एक-दूसरे के लिए मौजूद रहना चाहिए। उनकी जो शिकायतें हैं, उनके लिए हमने सात मेंबर की एक कमेटी बनाई है, जो म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के काम में मदद करेगी।”
अतुल गर्ग ने सभी काउंसलर और मेयर की एक मीटिंग भी की। हालांकि सौरभ जोशी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनकी पहुंच से बाहर होने पर कोई बात नहीं हो पाई। सूत्रों ने कहा कि पार्टी के चंडीगढ़ अध्यक्ष जतिंदर मल्होत्रा भी मेयर से बात नहीं कर पाए।
बीजेपी के एक वरिष्ठ पार्षद ने कहा, “हममें से ज़्यादातर ने लीडरशिप को बताया कि हम चुने हुए प्रतिनिधियों को मेयर के ऑफिस के साथ कोऑर्डिनेट करने में मुश्किल हो रही है और बढ़ते कम्युनिकेशन गैप से गवर्नेंस और पार्टी के अंदरूनी कोऑर्डिनेशन दोनों पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा, प्रदेश प्रभारी ने चिंता जताई कि पहुंच से बाहर होने की सोच से पार्टी को जमीनी स्तर पर राजनीतिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि इस साल नगर निगम चुनाव होने हैं।”
क्यों बढ़ी नाराजगी?
यह नाराज़गी हाल ही में लायंस कंपनी से जुड़े विवाद के बीच भी आई है, जहां बीजेपी और कांग्रेस के पार्षद शहर में सफाई व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं पर एक ही मंच पर दिखे थे। वरिष्ठ पार्षद ने आगे कहा, “इंचार्ज को यकीन था कि उन्होंने (मेयर) शायद मीटिंग नहीं बुलाई होगी, लेकिन इत्तेफाक से एक के बाद एक, पार्षद इकट्ठा हुए और सफाई के मुद्दे पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की।”इस घटनाक्रम से बीजेपी के हलकों में सुगबुगाहट शुरू हो गई थी, और कुछ नेताओं ने निजी तौर पर इस घटना से निकलने वाले राजनीतिक संदेश पर सवाल उठाए थे।
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