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गुजरात भाजपा में बगावत: नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहे वसावा ने छोड़ी पार्टी, पीएम को भी लिखी थी चिट्ठी

वसावा पहली बार 25 नवंबर, 1998 में गुजरात के भरूच संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव में 12वीं लोकसभा के लिए चुनाव जीते थे।

Edited By Ikram नई दिल्ली | Updated: December 29, 2020 3:40 PM
मनसुख वसावा। (Source: Lok Sabha archives)

गुजरात में भाजपा को पार्टी स्तर पर बड़ा झटका लगा है। मंगलवार (29 दिसंबर, 2020) को पूर्व केंद्रीय मंत्री (मोदी सरकार में) और भरूच से भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने अचानक पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि वो संसद के बजट सत्र के दौरान सांसद पद से भी इस्तीफा दे देंगे। उनका इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र के बाद आया है। उस पत्र में उन्होंने नर्मदा जिले के 121 गांवों को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना को वापस लेने की मांग की थी।

गुजरात भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल को भेजे एक पत्र में उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा सत्र में वो अपना लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुझे मेरी क्षमता से ज्यादा मौके दिए। इसके लिए मैं हमेशा केंद्रीय नेतृत्व का आभारी रहूंगा। मैं पार्टी सिद्धांतों के साथ अपने निजी विश्वास का भी सावधानीपूर्वक पालन करता रहा हूं। पत्र में आगे कहा, ‘मेरी गलतियों से पार्टी को नुकसान ना हो इसलिए मैं अपना इस्तीफा दे रहा हूं। प्लीज मुझे माफ कर दें। मैं आगामी बजट सत्र के दौरान माननीय लोकसभा स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंप दूंगा।’ हालांकि उनके पार्टी छोड़ने और इस्तीफा देने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। मगर बताया जाता है कि पार्टी ऐसा ना करने के लिए मनाने की कोशिश करेगी।

बता दें कि वसावा ने पिछले सप्ताह पीएम को पत्र लिखा था और उनसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के आदेश को किसानों और स्थानीय लोगों के हित में वापस लेने का आग्रह किया था। पत्र में कहा- MoEFCC अधिसूचना के नाम पर सरकारी अधिकारियों ने आदिवासियों की निजी संपत्तियों में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। नर्मदा में स्थानीय आदिवासियों को विश्वास में नहीं लिया गया या इस मुद्दे की समझ नहीं दी गई है, जिससे उनमें भय और अविश्वास पैदा हुआ है।

उन्होंने पत्र में कहा था कि स्थानीय लोग विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच कुछ विपक्षी दल सरकार और लोगों के बीच बातचीत ना होने की कमी का लाभ उठा रहे हैं। उन्हें सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं।

बता दें कि वसावा के पार्टी छोड़ने से भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्योंकि गुजरात में अगले साल की शुरुआत में स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं। उल्लेखनीय है कि वसावा पहली बार 25 नवंबर, 1998 में गुजरात के भरूच संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव में 12वीं लोकसभा के लिए चुनाव जीते थे। एक समय में ये क्षेत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का गढ़ था।

दूसरी तरफ असम में कांग्रेस से निष्कासित दो विधायक राजदीप गोवाला और अंजता नेग मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गए। इस दौरान असम सरकार में मंत्री और भाजपा नेता हेमंत बिसव सरमा वहां मौजूद रहे। पार्टी छोड़ने के बाद गोवाला ने कहा कि कांग्रेस में अनुशासन नहीं है और पार्टी दिशाविहीन है। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व जमीन कार्यकर्ताओं की परवाह नहीं करता। वहीं नेग ने कहा कि कांग्रेस का कोई विजन नहीं है।

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