ताज़ा खबर
 

वंशवाद और जातिवाद अपनाने से भाजपा को अपनों से ही खतरा

राजस्थान के दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के उम्मीदवारों के मामले में भाजपा के जातिवाद व वंशवाद अपनाने से पार्टी के एक खेमे में नाराजगी पनप गई है।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान के दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के उम्मीदवारों के मामले में भाजपा के जातिवाद व वंशवाद अपनाने से पार्टी के एक खेमे में नाराजगी पनप गई है। इसके चलते अब उपचुनाव में भाजपा को भितरघात होने का अंदेशा हो गया है। पार्टी के संघनिष्ठ कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए अब आरएसएस का सहारा भी लिया जा रहा है। दूसरी तरफ संघ से जुडेÞ लोग प्रदेश में सरकार की कार्यशैली के चलते उपचुनाव से दूरी बनाए हुए हैं। राज्य में 29 जनवरी को होने वाले अजमेर और अलवर लोकसभा के साथ ही माडंलगढ विधानसभा सीट का उपचुनाव प्रदेश भाजपा नेतृत्व के लिए जबरदस्त प्रतिष्ठा का बन गया है। प्रदेश नेतृत्व ने विचारधारा के उलट जाते हुए केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव डाल कर अपनी पसंद के उम्मीदवारों का चयन करवाया है। इसमें भाजपा ने पूरी तरह से जातिवाद और वंशवाद का कार्ड खेलकर प्रत्याशियों का चयन किया है।

अजमेर सीट से दिवंगत सांसद सावंरलाल जाट के बेटे रामस्वरूप लांबा को टिकट देने से ही साफ है कि विश्व की सबसे ज्यादा संख्या वाली पार्टी कोई अन्य उम्मीदवार नहीं खोज पाई। अलवर सीट पर भी यादव मतदाताओं की संख्या को देखते हुए प्रदेश के श्रम मंत्री जसवंत यादव को सिर्फ जातिवाद के आधार पर ही उम्मीदवारी दी गई। अलवर सीट पर तो भाजपा के ही लोग खासे नाराज है। उम्मीदवार बनाए गए जसवंत यादव पुराने कांग्रेसी है। दोनों लोकसभा सीटों पर गैरसंघियों की उम्मीदवारी से आरएसएस खफा है। संघ से जुडेÞ भाजपा नेताओं का कहना है कि जब राज्य सरकार जनहित के विकास कार्यों का दावा करके उपचुनाव जीतने की बात कर रही है तो उसे जातिवाद और वंशवाद से दूर होकर साधारण कार्यकर्ता को मौका देना चाहिए था। प्रदेश भाजपा पिछले तीन महीने से उपचुनाव वाली सीटों के उम्मीदवारों के चयन के लिए जमकर कसरत करती रही जबकि इसी दौरान उम्मीदवार बनाए गए नेता साफ तौर पर पार्टी को धमकाते भी रहे। इनका कहना था कि उनके अलावा कोई भी उपचुनाव नहीं जीत सकता है।

इससे घबरा कर ही पार्टी को उन्हीं नेताओं को प्रत्याशी बना कर मैदान में उतारना पड़ा। घोषित उम्मीदवार चुनावों की घोषणा से पहले ही जातिवाद और वंशवाद के नाम पर ताल ठोक रहे थे। इससे ही पार्टी का एक खेमा अब सवाल उठा रहा है कि जब यही करना था तो फिर तीन महीने तक उम्मीदवार तलाशने का अभियान छेड़ना कार्यकर्ताओं को भुलावे में रखने जैसा है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने अजमेर में चौंकाते हुए रघु शर्मा को मैदान में उतार कर भाजपा के परंपरागत सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगा दी है।

कांग्रेस ने अलवर में 15 दिन पहले ही डॉक्टर करण सिंह यादव को उम्मीदवार बना कर भाजपा को पछाड़ दिया था। प्रदेश के उपचुनावों को लेकर अब भाजपा को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड रही है। भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं की उदासीनता से पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है। अलवर में कांग्रेस के डॉक्टर करण सिंह यादव ने सोमवार को बडेÞ जुलूस के साथ अपना परचा दाखिल कर भाजपा खेमे में खलबली मचा दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का कहना है कि जनता उपचुनावों में ही भाजपा को सबक सिखा देगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी का कहना है कि उम्मीदवारों को लेकर पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है। पूरी पार्टी एकजुट होकर उपचुनाव जीतेगी। राज्य की वसुंधरा सरकार के कामकाज से जनता खुश है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.