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कमलनाथ सरकार ने टेक्स्टबुक से हटवाया दीनदयाल उपाध्याय और शंकराचार्य के चैप्टर? बीजेपी का आरोप

शून्य काल के दौरान इस मामले को सदन में उठाते हुए भाजपा विधायक विश्वास सारंग ने कहा कि प्रदेश सरकार ने भाजपा के विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय और सनातन धर्म के आदि शंकराचार्य के अध्याय, स्कूली पाठ्यक्रम से हटाने के निर्देश दिए हैं।

Author नई दिल्ली | July 21, 2019 7:40 AM
कमलनाथ सरकार पर भाजपा की तरफ से यह आरोप विधानसभा में लगाया गया। (फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश में स्कूली सिलेबस में बदलाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा में लड़ाई तेज हो गई है। राजस्थान के बाद अब यह लड़ाई मध्यप्रदेश में भी पहुंच चुकी है। भाजपा जहां कांग्रेस सरकार पर टेक्स्ट बुक से भाजपा विचारक दीनदयाल उपाध्याय और आदि शंकराचार्य के अध्याय हटाने के आरोप लगा रही हैं।

वहीं कांग्रेस ने भी टेक्स्टबुक में महापुरुषों के चैप्टर हटाए जाने के मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केन्द्र सरकार ने शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम से कई स्वतंत्रता सेनानियों के अध्याय हटा दिये हैं। इस बहस में व्यवस्था देते हुए अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि संबंधित मंत्री इस मामले में संज्ञान लें और कहा कि इन अध्यायों को पाठ्यक्रम से हटाया जाना उचित नहीं है।

इससे पहले विधानसभा में विपक्षी पार्टी भाजपा ने शनिवार को प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पंडित दीनदयाल उपाध्याय और आदि शंकराचार्य के अध्याय, प्रदेश के स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम से हटाने के आदेश दिये हैं। हालांकि विधानसभा के अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने संबंधित मंत्री को इस मामले में संज्ञान लेने के निर्देश दिये।

शून्य काल के दौरान इस मामले को सदन में उठाते हुए भाजपा विधायक विश्वास सारंग ने कहा कि प्रदेश सरकार ने भाजपा के विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय और सनातन धर्म के आदि शंकराचार्य के अध्याय, स्कूली पाठ्यक्रम से हटाने के निर्देश दिए हैं।

सांरग ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने राजनीतिवश इस प्रकार के निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन का सिद्धांत दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों के उत्थान में लगा दिया। भाजपा विधायक ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश भर में यात्रा कर देश की एकता के लिये काम किया।

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इस मामले में बहस कराने की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार का यह कदम हमारे इतिहास, हमारी धरोहर और सनातन धर्म की समृद्ध संस्कृति के खिलाफ है। स्पीकर के आश्वसान के बाद भाजपा को उम्मीद है कि इस संबंध में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

(भाषा से इनपुट के साथ)

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