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दो केंद्रीय मंत्रियों ने बढ़ाई पीएम मोदी की मुश्किलें, अपर ज्यूडिशरी में मांगा आरक्षण

कुशवाहा ने कहा कि अपर ज्यूडिशरी में आरक्षण नहीं होने की वजह से दलित विरोधी फैसलों की भरमार है। हाल के दिनों में भी कई दलित विरोधी फैसले दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दो मंत्रियों ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में आरक्षण की मांग की है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान और केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने इस मांग के साथ ही मोदी सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए उच्च न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

केंद्रीय मंत्री और राजग के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान ने कहा कि यह उनकी मांग पर जोर देने के लिए आंदोलन शुरू करने का सही समय है। उन्होंने पटना में भीमराव अंबेडकर की जयंती पर दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं लोजपा प्रमुख की हैसियत से बोल रहा हूं कि हमें न्यायापालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करना चाहिए।’’ पासवान ने बिहार में निचली और उच्च न्यायिक सेवाओं में आरक्षण लाने के लिए नीतीश कुमार सरकार की सराहना की।

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अन्य केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि देश में आरक्षण खत्म करने की बात कोई भी नहीं सोच सकता है। कार्यक्रम में मौजूद कुशवाहा ने कहा, ‘‘हम अधिक आरक्षण की मांग करेंगे। हम अपना मिशन पूरा होने तक नहीं रुकेंगे… ये दिल मांगे मोर।’’ उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को एक प्रणाली बनानी चाहिए जहां गरीब लोग उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बन सकें। कुशवाहा ने कहा कि अपर ज्यूडिशरी में आरक्षण नहीं होने की वजह से दलित विरोधी फैसलों की भरमार है। हाल के दिनों में भी कई दलित विरोधी फैसले दिए गए हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट 1989 के नियमों बदलाव करने को विरोध में देशभर में 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया गया था। बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शनिवार को बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जयंती पर कहा था कि किसी में इतनी ताकत नहीं जो आरक्षण खत्म कर सके।

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